बिहार पुलिस को मिली बड़ी सफलता, तीन नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण; भारी मात्रा में सौंपा गोला-बारूद

Bihar Maoist Surrender: रविवार को बिहार पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई में बड़ी सफलता प्राप्त की, जब मुंगेर जिले में तीन इनामी नक्सलियों ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया.

Bihar Police three Naxalites surrender Ammunition handed over in large quantities
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Bihar Maoist Surrender: रविवार को बिहार पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई में बड़ी सफलता प्राप्त की, जब मुंगेर जिले में तीन इनामी नक्सलियों ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. 

इनमें से दो प्रमुख नक्सली नारायण कोड़ा और बहादुर कोड़ा, जिन्हें राज्य सरकार ने क्रमशः तीन-तीन लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, ने इस निर्णय को लिया. इन नक्सलियों का आत्मसमर्पण न केवल पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी है, बल्कि यह बिहार के नक्सलवाद विरोधी अभियान के एक महत्वपूर्ण मोड़ को भी दिखाता है.

नक्सलियों ने दिया भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद

आत्मसमर्पण करने वाले इन तीन नक्सलियों ने अपने साथ भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस को सौंपे. जानकारी के अनुसार, उन्होंने दो इंसास राइफल, चार एसएलआर राइफल, लगभग 500 चक्र कारतूस, वॉकी-टॉकी और बम जैसी अन्य खतरनाक सामग्री पुलिस के समक्ष पेश की. यह दिखाता है कि नक्सलियों के पास कितनी बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद था, जो उन्होंने अब पुलिस के समक्ष छोड़ दिए हैं.

इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया क्योंकि वे बिहार सरकार की आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति से प्रभावित थे. इसके अलावा, राज्य सरकार और सुरक्षा बलों के द्वारा लगातार किए जा रहे अभियान और स्थानीय लोगों के सहयोग के कारण उन्होंने यह कदम उठाया.

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का परिचय

आत्मसमर्पण करने वालों में तीन प्रमुख नक्सली शामिल थे:

  • नारायण कोड़ा - जोनल कमांडर और 23 नक्सली कांडों में फरार थे.
  • बहादुर कोड़ा - जोनल कमांडर और 24 नक्सली कांडों में फरार थे.
  • बिनोद कोड़ा - जो तीन नक्सली कांडों में फरार दस्ता सदस्य थे.

ये तीन नक्सली लंबे समय से कानून से भागे हुए थे और इनका नाम राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उग्रवादियों की सूची में था. उनका आत्मसमर्पण बिहार पुलिस के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है, क्योंकि यह राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के प्रभाव को दर्शाता है.

समारोह में शामिल हुए कई प्रमुख अधिकारी

इस महत्वपूर्ण आत्मसमर्पण समारोह में बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, एडीजी हेडक्वार्टर- लॉ एंड ऑर्डर कुंदन कृष्णन, STF एसपी संजय सिंह, और कई सीनियर पुलिस अधिकारी शामिल हुए. इसके अलावा, बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे. इस अवसर पर पूर्व में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के परिवार भी उपस्थित थे, जिनमें रावण कोड़ा और भोला कोड़ा के परिजन शामिल थे. अधिकारियों ने इन नक्सलियों के परिवारों को भी सम्मानित किया, जो अब शांतिपूर्वक जीवन जी रहे हैं.

बिहार पुलिस के प्रयासों की सराहना

बिहार पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने इस मौके पर नक्सलवाद उन्मूलन के क्षेत्र में बिहार पुलिस की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि बिहार ने माओवादियों के खिलाफ काफी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसके परिणामस्वरूप राज्य के कई इलाकों से माओवाद समाप्त हो चुका है. उन्होंने यह भी बताया कि बिहार में माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की लगातार सक्रियता और विकास कार्यों के चलते नक्सलवाद का प्रभाव शून्य हो गया है.

विनय कुमार ने यह भी कहा कि 23 अतिउग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलियों की उपस्थिति अब लगभग समाप्त हो चुकी है, और इन क्षेत्रों में विकास कार्य अब तेजी से हो रहे हैं. उन्होंने यह जोर दिया कि यह सफलता न केवल सुरक्षा बलों की कड़ी मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह स्थानीय समुदायों के सहयोग और प्रशासन के प्रयासों का भी प्रतिफल है.

नक्सलवाद के खिलाफ विकास कार्यों का महत्व

बिहार पुलिस की रणनीति अब केवल सुरक्षा उपायों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकास को भी प्राथमिकता दे रही है. अधिकारियों ने बताया कि विकास के कामों को नक्सल प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने से स्थानीय लोगों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है, और इसने उन्हें हिंसा और उग्रवाद से दूर रखा है. 

सड़कें, स्कूल, अस्पताल और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास से यह सुनिश्चित किया गया है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके. इस बदलाव के परिणामस्वरूप, नक्सलवाद का प्रभाव धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और लोग अब शांति और समृद्धि की ओर बढ़ रहे हैं.

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