25 सालों के बाद छोड़ना पड़ेगा राबड़ी देवी को ये बंगला, भवन निर्माण विभाग ने भेजा नोटिस

Rabri Devi Bungalow: बिहार में एनडीए की सत्ता में वापसी के साथ ही राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव दिखने लगा है. नई सरकार के गठन के सिर्फ कुछ ही दिनों बाद राज्य के भवन निर्माण विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को उनका वर्तमान सरकारी आवास खाली करने का आदेश जारी कर दिया. 

bihar Rabri Devi will have to leave this bungalow after 25 years
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Rabri Devi Bungalow: बिहार में एनडीए की सत्ता में वापसी के साथ ही राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव दिखने लगा है. नई सरकार के गठन के सिर्फ कुछ ही दिनों बाद राज्य के भवन निर्माण विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को उनका वर्तमान सरकारी आवास खाली करने का आदेश जारी कर दिया. 

यह कदम सीधे-सीधे संकेत देता है कि सत्ता परिवर्तन का असर अब सरकारी आवासों तक पहुंच गया है. हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते राबड़ी देवी को नया आवास तुरंत आवंटित भी कर दिया गया है.

हार्डिंग रोड बना लालू परिवार का नया पता

भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में राबड़ी देवी को हार्डिंग रोड स्थित आवास संख्या-39 दिया गया है. आदेश में स्पष्ट लिखा गया है कि पूर्व आदेश को रद्द करते हुए यह नया ठिकाना राबड़ी देवी के लिए वैध सरकारी आवास होगा. विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें सुरक्षा और सुविधाओं के पूर्ण मानकों के साथ आवास उपलब्ध कराया जाए.

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पूर्व मुख्यमंत्री होने का विशेष अधिकार

राबड़ी देवी को मिला नया आवास उनकी दोहरी भूमिका, पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के आधार पर दिया गया है. यह सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा है, जहां पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुरक्षा और प्रोटोकॉल के आधार पर आवास आवंटित किया जाता है. इसलिए, आवास परिवर्तन राजनीतिक निर्णय जरूर है, लेकिन सरकारी प्रक्रिया से बाहर नहीं.

10 सर्कुलर रोड, जहां से चलती थी आरजेडी की राजनीति

राबड़ी देवी और लालू यादव का परिवार 2005 से पटना के 10 सर्कुलर रोड वाले बंगले में रह रहा है. यह आवास सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि आरजेडी के लिए पावर सेंटर माना जाता रहा है. इसी बंगले से पार्टी की रणनीति बनती है, बैठकें होती हैं और चुनावी फैसले निकलते हैं. यही कारण है कि इस बंगले को खाली करने का आदेश राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है.

विपक्ष की प्रतिक्रिया पर टिकी निगाहें

सरकार का यह फैसला विपक्षी दलों, खासकर आरजेडी, को रास नहीं आएगा, यह लगभग तय है. ऐसे में राजनीतिक माहौल गरमाने की पूरी संभावना है. अब देखना यह होगा कि राजद इस आदेश को सरकारी प्रक्रिया मानकर स्वीकार करती है या इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई के रूप में पेश करती है.

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