इस्लामाबाद: जब देश की सरहदें असुरक्षित हों और अंदर से ही खतरा सिर उठाने लगे, तो सवाल उठना लाज़िमी है कि क्या सिर्फ विदेश दौरों और राजनीतिक डील्स से किसी देश की सुरक्षा मजबूत की जा सकती है? पाकिस्तान के मौजूदा हालात इसी सवाल की तरफ इशारा कर रहे हैं.
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर जहां इन दिनों विदेशी दौरों पर बिजनेस और कूटनीतिक डील्स में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर देश के भीतर सेना को दोहरे आतंकी हमलों का सामना करना पड़ा है. ये हमले इतने घातक और सुनियोजित थे कि उन्होंने पाकिस्तान की सैन्य संरचना को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया.
बलूचिस्तान में BLA का ताबड़तोड़ हमला
बलूचिस्तान के तुर्बत इलाके में जो हुआ, वो पाकिस्तान की सेना के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था. रिपोर्ट्स के अनुसार, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पहले एक जोरदार धमाके से सेना के काफिले को चौंकाया और फिर हथियारों से लैस हमलावरों ने सेना की बसों पर सीधे फायरिंग शुरू कर दी.
यह हमला केवल एक आतंकी कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक सटीक और सुनियोजित सैन्य ऑपरेशन जैसा था जिसमें हमलावरों का लक्ष्य स्पष्ट था: सेना को अधिकतम नुकसान पहुंचाना.
घटनास्थल से मिल रही खबरों के मुताबिक, कई सैनिकों के हताहत होने की आशंका है, हालांकि पाकिस्तानी सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक संख्या जारी नहीं की गई है.
डेरा इस्माइल खान में आत्मघाती हमला
बलूचिस्तान की घटना के कुछ ही घंटों बाद खैबर पख्तूनख्वा के डेरा इस्माइल खान में एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को सेना के काफिले में घुसा दिया.
इस हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि धमाके की आवाज़ कई किलोमीटर तक सुनाई दी और घटनास्थल पर भारी तबाही का मंजर देखने को मिला.
सेना ने बयान जारी करते हुए कहा कि हमला बेहद सुनियोजित था और इसका मकसद सेना के मनोबल को कमजोर करना था. इन दोनों हमलों ने यह साफ कर दिया कि पाकिस्तान के अंदरूनी हालात कितने संवेदनशील और अस्थिर हो चुके हैं.
जब जनरल विदेश में, तब देश अंदर से घायल
इन हमलों के साथ एक और गंभीर सवाल खड़ा होता है कि जब देश के भीतर सेना पर इस स्तर के हमले हो रहे थे, तब पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर कहां थे?
वह विदेशी दौरों पर थे, जहां वह आर्थिक और सुरक्षा से जुड़ी डील्स को अंतिम रूप देने में लगे हुए थे. हालांकि अंतरराष्ट्रीय संबंध बनाना एक महत्वपूर्ण कार्य है, लेकिन घरेलू सुरक्षा की अनदेखी उसके लिए माफ नहीं की जा सकती.
पाकिस्तानी सेना को लंबे समय से बलूच विद्रोहियों और आतंकवादी संगठनों से चुनौती मिल रही है, लेकिन ताजा हमले यह दर्शाते हैं कि हालात पहले से कहीं ज़्यादा बिगड़ चुके हैं.
बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा: आतंक का अड्डा
यह कोई पहली बार नहीं है जब बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे सीमावर्ती इलाकों में आतंकियों ने सेना को निशाना बनाया हो. ये इलाके वर्षों से उग्रवाद, अलगाववाद और चरमपंथ का गढ़ बने हुए हैं.
सरकार और सेना की लाख कोशिशों के बावजूद वहां की जमीन पर असंतोष और संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है. BLA जैसे संगठन केवल बंदूक नहीं चला रहे हैं, बल्कि वे एक सियासी संदेश भी देने की कोशिश कर रहे हैं कि पाकिस्तान की फौजी ताकत भी अब उन्हें रोकने में नाकाम हो रही है.
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