BMC Election Results: महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद अब सबकी निगाहें बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) के परिणाम पर टिकी हैं. हालांकि यह एक स्थानीय निकाय चुनाव है, लेकिन राजनीतिक दल इसे ‘मिनी विधानसभा चुनाव’ की तरह गंभीरता से ले रहे हैं. इस बार चुनाव में खास तौर पर यह देखना दिलचस्प है कि देश के सबसे धनी नगर निगम की सत्ता किसके हाथ में जाएगी.
बीएमसी पर लंबे समय से शिवसेना-यूबीटी का कब्जा है और यह पार्टी पिछले 25 साल से यहां मजबूत रही है. यही कारण है कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के लिए यह चुनाव केवल नगर निगम तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव और साख का बड़ा सवाल बन चुका है.
29 नगर निगमों में औसत मतदान प्रतिशत
गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में मतदान संपन्न हुआ. इन नगर निगमों में औसतन 46 से 50 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. मतदान के दौरान कई जगहों पर झड़पें, फर्जी मतदान के आरोप, नकदी बांटने की शिकायतें और ईवीएम से संबंधित तकनीकी परेशानियां भी सामने आईं.
इन घटनाओं ने चुनाव आयोग और प्रशासन की सतर्कता बढ़ा दी है, और कई स्थानों पर चुनाव अधिकारी चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपाय कर रहे हैं.
शिवसेना-यूबीटी को चुनाव आयोग का नोटिस
बीएमसी चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) को एक और चुनौती का सामना करना पड़ा. चुनाव आयोग ने पूर्व मेयर और शिवसेना (यूबीटी) की उम्मीदवार किशोरी पेडनेकर को नोटिस जारी किया. यह नोटिस किरित सोमैया द्वारा दायर शिकायत के बाद आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि पेडनेकर ने झूठा या भ्रामक हलफनामा दाखिल किया है. सोमैया ने पेडनेकर की उम्मीदवारी रद्द करने की मांग भी की थी.
इस मामले में चुनाव आयोग ने पेडनेकर को तुरंत जवाब देने के लिए निर्देश दिए हैं. राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह विवाद चुनावी माहौल को और गर्मा सकता है.
फडणवीस-शिंदे जोड़ी ने बढ़त बनाई
बृहन्मुंबई महानगरपालिका के लिए वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है. शुरुआती रुझानों में कुल 64 वार्डों के आंकड़े सामने आए हैं. इनमें एनडीए गठबंधन के देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की जोड़ी 45 वार्डों में आगे चल रही है.
वहीं, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की जोड़ी फिलहाल पीछे चल रही है. शुरुआती आंकड़ों के आधार पर ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस गठबंधन के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि अगर यह रुझान स्थिर रहते हैं तो बीएमसी में सत्ता का संतुलन बड़े पैमाने पर बदल सकता है.
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