Anurag Kashyap On Dhurandhar: आदित्य धर के निर्देशन में बनी स्पाई एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर’ रिलीज के बाद से लगातार बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास रच रही है. रणवीर सिंह स्टारर यह फिल्म 5 दिसंबर 2025 को सिनेमाघरों में आई थी और तब से दर्शकों की पहली पसंद बनी हुई है. मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, ‘धुरंधर’ अब भारत की टॉप 5 सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में अपनी जगह बना चुकी है और इसकी कुल कमाई 1000 करोड़ रुपये के आंकड़े को भी पार कर चुकी है.
इस अभूतपूर्व सफलता के बाद फिल्म के निर्देशक आदित्य धर को इंडस्ट्री के कई बड़े नामों से सराहना मिल रही है. इसी कड़ी में फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने भी फिल्म को लेकर अपनी राय जाहिर की है, जिसमें उन्होंने फिल्ममेकिंग और रणवीर सिंह के अभिनय की खुलकर तारीफ की है, हालांकि कुछ पहलुओं पर उन्होंने असहमति भी जताई है.
अनुराग कश्यप का ‘धुरंधर’ पर नजरिया
अनुराग कश्यप ने सोशल प्लेटफॉर्म लेटरबॉक्सड पर ‘धुरंधर’ का रिव्यू साझा किया. उन्होंने लिखा कि जासूसी और सैन्य पृष्ठभूमि वाली फिल्मों में देश के प्रति गुस्सा और भावनात्मक उग्रता एक स्वाभाविक तत्व होता है. उनके मुताबिक, अगर किसी जासूस या सैनिक के भीतर दुश्मन देश के खिलाफ तीव्र भावनाएं नहीं हैं, तो उसकी भूमिका अधूरी लगती है.
हालांकि अनुराग ने यह भी साफ किया कि फिल्म के दो डायलॉग्स उन्हें खटकते हैं. एक दृश्य में आर. माधवन के किरदार द्वारा कहा गया संवाद और दूसरा फिल्म के अंत में रणवीर सिंह का “ये नया इंडिया है” वाला संवाद उन्हें अनावश्यक रूप से प्रचारात्मक लगा. अनुराग के अनुसार, इन दो पंक्तियों को छोड़ दिया जाए तो ‘धुरंधर’ एक बेहद प्रभावशाली और दमदार फिल्म है, जो पूरी तरह पाकिस्तान की पृष्ठभूमि में सेट होकर भी दर्शकों को बांधे रखती है.
आदित्य धर को लेकर अनुराग कश्यप की राय
अनुराग कश्यप ने आदित्य धर के साथ अपने पुराने संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि वे आदित्य को उनकी 2009 की नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली शॉर्ट फिल्म ‘बूंद’ के समय से जानते हैं. अनुराग के मुताबिक, आदित्य धर एक ईमानदार फिल्ममेकर हैं, जिनकी राजनीति अवसरवाद से नहीं, बल्कि निजी अनुभवों और सच्चाई से निकलती है.
उन्होंने लिखा कि आदित्य कश्मीरी पंडित हैं और उन्होंने अपने जीवन में कई कठिन दौर देखे हैं. यही वजह है कि उनकी फिल्मों में कश्मीर और उससे जुड़े विषय बार-बार नजर आते हैं. अनुराग का मानना है कि आप आदित्य की सोच से सहमत हों या असहमत, लेकिन उनकी फिल्ममेकिंग की गुणवत्ता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता.
प्रोपेगैंडा बनाम फिल्ममेकिंग पर टिप्पणी
अनुराग कश्यप ने अपने रिव्यू में अंतरराष्ट्रीय सिनेमा का उदाहरण देते हुए लिखा कि हॉलीवुड की कई ऑस्कर विजेता फिल्में जैसे द हर्ट लॉकर, जीरो डार्क थर्टी या हाउस ऑफ डायनामाइट भी अपने-अपने देशों के नजरिए से बनी प्रोपेगैंडा फिल्में रही हैं. उन्होंने कहा कि ‘धुरंधर’ में मौजूद दो प्रचारात्मक डायलॉग्स को उन्होंने नजरअंदाज किया और फिल्म की तकनीकी मजबूती, निर्देशन की जिद और कहानी कहने के तरीके को महत्व दिया.
अनुराग के अनुसार, रणवीर सिंह का अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है और उनका परफॉर्मेंस बेहद आत्मविश्वास से भरा हुआ है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर कभी फिल्म की राजनीति पर चर्चा करनी होगी, तो वह सीधे आदित्य धर से बात करेंगे, लेकिन एक सिनेमा के तौर पर ‘धुरंधर’ एक अहम और प्रभावशाली फिल्म है.
‘धुरंधर’ की कहानी और पृष्ठभूमि
‘धुरंधर’ दो फिल्मों की प्रस्तावित सीरीज का पहला भाग है. यह एक भारतीय जासूस की कहानी है, जो कराची की अंडरवर्ल्ड और राजनीतिक व्यवस्था के भीतर घुसपैठ करता है. फिल्म की कहानी को और यथार्थवादी बनाने के लिए इसमें कई वास्तविक घटनाओं को शामिल किया गया है.
फिल्म में 1999 का IC-814 विमान अपहरण, 2001 का संसद हमला, 2008 का मुंबई आतंकी हमला और ऑपरेशन ल्यारी जैसे अहम घटनाक्रमों को कहानी के साथ जोड़ा गया है. इन्हीं तत्वों की वजह से ‘धुरंधर’ सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं, बल्कि हालिया इतिहास से जुड़ी एक गंभीर और रोमांचक सिनेमाई प्रस्तुति बनकर उभरी है.
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