Dhurandhar Movie: हर खेल में चाहे जितने खिलाड़ी मैदान पर हों, असली याद उसी को किया जाता है जो मैच की दिशा बदल देता है. आदित्य धर की फिल्म धुरंधर भी कुछ ऐसी ही है, यह कहानी भले ही कई बड़े चेहरों को साथ लेकर चलती है, लेकिन पर्दे पर ऐसा प्रभाव एक ही कलाकार छोड़ जाता है. लगभग तीन घंटे से ज्यादा की इस फिल्म में एक भी पल ऐसा नहीं था जब यह किरदार स्क्रीन पर आया हो और दर्शकों की नजर उससे हटी हो.
हॉल में हर बार तालियां और सीटियां उसी के हिस्से में आईं. दिलचस्प बात यह है कि यह नाम न रणवीर सिंह है, न पुलिस अफसर के रूप में नजर आने वाले संजय दत्त और न ही वह शख्स जो पर्दे के पीछे पूरी साजिश चला रहा है, आर. माधवन. फिर भी एक कलाकार ऐसा बना, जिसके सामने बाकी सब फीके लग गए.
फिल्म की सफलता और दमदार कलाकारों की मौजूदगी
‘धुरंधर’ के शुरुआती दिन की कमाई साफ दिखाती है कि दर्शकों ने फिल्म को स्वीकार किया है और फिल्म के कलाकारों की मेहनत रंग लाई है. रणवीर सिंह का एक्शन अवतार पहले भी देखा जा चुका है, लेकिन इस फिल्म में संजय दत्त की एंट्री ने थिएटर में अलग ही माहौल बना दिया. उनका किरदार कम समय में भी दर्शकों पर असर छोड़ जाता है. दूसरी ओर, अक्षय खन्ना एक ऐसे रूप में सामने आते हैं जो लंबे समय तक भुलाया नहीं जा सकता.
उनके किरदार का हर मोड़, हर संवाद और हर बदलाव देखने लायक है. इस बीच अर्जुन रामपाल और आर. माधवन अपनी भूमिकाओं में पूरी तरह फिट बैठते हैं, जबकि सारा अर्जुन और रणवीर सिंह की स्क्रीन साझेदारी कहानी को और मज़बूत बनाती है. लेकिन इतने दमदार नामों के बीच एक ऐसा चेहरा उभरता है जो फिल्म का “सच्चा प्रभावशाली खिलाड़ी” बन जाता है.
अक्षय खन्ना: विलेन के रूप में उभरा फिल्म का अनदेखा हीरो
फिल्म की शुरुआत आर. माधवन से होती है, और दर्शक धीरे-धीरे कहानी में डूबते हैं. लेकिन जैसे ही रणवीर सिंह की एंट्री होती है और उसके बाद अचानक अस्पताल के भीतर एक नए किरदार का आगमन होता है, फिल्म पूरी तरह से एक अलग मोड़ ले लेती है. यह एंट्री अक्षय खन्ना की है, जो रहमान डकैत के किरदार में दिखाई देते हैं. पहली ही झलक में जिस सर्द खामोशी और रहस्यमय अंदाज के साथ वह स्क्रीन पर आते हैं, दर्शक वहीं से उनके साथ जुड़ जाते हैं.
वह भले ही फिल्म में ‘विलेन’ कहलाते हों, पर असल में कहानी की धुरी वही हैं. उनका चेहरा, आवाज और अभिनय में वह गहराई है जिसने उनकी उपस्थिति को बाकी सभी से ऊपर खड़ा कर दिया. कई जगह तो ऐसा लगा मानो कैमरा खुद उनकी तरफ झुक रहा हो और बाकी पात्र सिर्फ़ उनके इर्द-गिर्द घूम रहे हों.
रहमान डकैत: एक ऐसा मास्टरमाइंड जिसे कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता
अक्षय खन्ना का किरदार सिर्फ़ हिंसा और डर पर आधारित नहीं है, बल्कि बुद्धिमत्ता, ठंडे दिमाग और असाधारण रणनीति से भरा हुआ है. उनका चरित्र बलूच इलाकों से जुड़े कनेक्शन के साथ गहराई पाता है, जहां वह सिर्फ़ मसल पॉवर के भरोसे नहीं बल्कि कई कदम आगे सोचकर अपना खेल खेलते दिखाई देते हैं.
उनके हर दृश्य में यह महसूस होता है कि रहमान डकैत सिर्फ़ एक अपराधी नहीं, एक योजना बनाने वाला, हर शख्स को पढ़ लेने वाला, और अवसर के हिसाब से खुद को ढाल लेने वाला शख्स है. यहां तक कि जब वह अपने परिवार के बीच होते हैं, तब भी उनका रवैया उतना ही दिलचस्प और असरदार रहता है. यह वह किरदार है जिसे एक्टर के अपने हुनर ने और भी ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. अक्षय खन्ना की बारीकियों पर पकड़ इतनी जबरदस्त है कि रणवीर सिंह और अन्य बड़े कलाकार भी कई जगह उनके सामने फीके पड़ जाते हैं.
स्टाइल, एक्सप्रेशन और स्क्रीन प्रेज़ेंस
रहमान डकैत का लुक ऐसा डिजाइन किया गया है, जो दर्शकों को पहली नजर में ही आकर्षित कर लेता है. उनके चेहरे पर हर सेकंड बदलते हावभाव कहानी को और तनावपूर्ण बना देते हैं. वह कभी शांत दिखाई देते हैं, कभी विस्फोटक, और कभी इतने तेज-तर्रार कि दर्शक समझ ही नहीं पाते कि आगे क्या होने वाला है.
अक्षय खन्ना की स्क्रीन प्रेज़ेंस इतनी भारी है कि जब वह फ्रेम में होते हैं, तो ध्यान किसी और पर जाने ही नहीं देता. संजय दत्त, रणवीर सिंह और अर्जुन रामपाल जैसे बड़े कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा करना आसान नहीं होता, लेकिन वह न केवल साझा करते हैं, बल्कि अपने हिस्से को सबसे ज्यादा चमकदार बनाते हैं. यही वजह है कि दर्शक फिल्म खत्म होने के बाद भी सबसे ज्यादा उसी किरदार के बारे में बात करते हैं.
यह भी पढ़ें- मिचेल स्टार्क ने इंग्लैंड के खिलाफ मचाया तहलका, ऐसा कारनामा करने वाले बने दुनिया के तीसरे खिलाड़ी