BRICS Naval Exercise: अमेरिका के साथ वैश्विक तनाव बढ़ते हुए ऐसे समय में रूस, चीन, ईरान और दक्षिण अफ्रीका ने दक्षिण अफ्रीका के तटों पर एक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास शुरू किया है. यह अभ्यास अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री रणनीति के क्षेत्र में इन देशों की बढ़ती सक्रियता और रणनीतिक एकजुटता का संकेत माना जा रहा है.
इस अभ्यास को पहले Exercise MOSI III के नाम से जाना जाता था, लेकिन इस बार इसे नया नाम “Will for Peace” दिया गया है. अभ्यास का उद्देश्य आधिकारिक रूप से सुरक्षा और प्रशिक्षण पर केंद्रित है, लेकिन इसके राजनीतिक और रणनीतिक संदेश को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
🇨🇳🇷🇺🇮🇷Chinese, Russian and Iranian Naval ships has arrived in Cape Town, South Africa for a Joint BRICS Naval Exercise pic.twitter.com/AZOaNhv07s
— InsightWorld (@insight_44) January 9, 2026
कौन कर रहा है नेतृत्व और मेजबानी
अभ्यास की अगुवाई चीन कर रहा है, जबकि दक्षिण अफ्रीका मेजबान देश के रूप में इसे आयोजित कर रहा है. हालांकि यह अभ्यास आधिकारिक रूप से BRICS की पहल के रूप में आयोजित नहीं किया गया है, लेकिन इसमें शामिल देशों की मौजूदगी इसे BRICS की शक्ति और एकजुटता का प्रदर्शन बनाती है.
BRICS के मौजूदा सदस्य देशों में दक्षिण अफ्रीका, चीन और रूस शामिल हैं, जबकि ईरान हाल ही में इस समूह में जुड़ा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभ्यास के जरिए इन देशों ने समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के महत्व को प्रदर्शित किया है.
अभ्यास का उद्देश्य
दक्षिण अफ्रीकी नेशनल डिफेंस फोर्स के अनुसार, इस संयुक्त अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य समुद्री सुरक्षा बढ़ाना, नौसेनाओं के बीच सहयोग और सामूहिक संचालन की क्षमता को मजबूत करना, और महत्वपूर्ण शिपिंग रूट्स की रक्षा करना है.
हालांकि, सुरक्षा और प्रशिक्षण के अलावा, इस अभ्यास का राजनीतिक संदेश भी काफी महत्वपूर्ण है. रूस, चीन और ईरान के संयुक्त भागीदारी को देखते हुए यह स्पष्ट होता है कि ये देश अमेरिका और पश्चिमी गठबंधन को एक रणनीतिक संदेश देना चाहते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका की नौसेना इस समय लंबे समुद्री अभियानों के संचालन में पूरी तरह सक्षम नहीं है. ऐसे में विदेशी नौसेनाओं के साथ अभ्यास करना उसे तकनीकी अनुभव, प्रशिक्षण और समुद्री संचालन में सामूहिक दक्षता हासिल करने का अवसर देता है.
अभ्यास के दौरान हो रही गतिविधियाँ
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अभ्यास में विभिन्न युद्धपोतों के बीच कम्युनिकेशन ड्रिल, सामूहिक संचालन और तालमेल पर विशेष जोर दिया जा रहा है. इसमें PASSEX (Passing Exercise) जैसी तकनीकें भी शामिल हैं, जिसमें जहाज एक निर्धारित फॉर्मेशन में चलने और आपसी समन्वय के अभ्यास करते हैं.
विशेषज्ञ डीन विंग्रिन के अनुसार, इस तरह के अभ्यास नौसेनाओं के लिए बेहद आवश्यक होते हैं. खुले समुद्र में किसी भी देश को अकेले काम करना संभव नहीं है, और संकट या युद्ध जैसी स्थिति में सहयोग और तालमेल जीवन रक्षक साबित हो सकता है.
अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए संकेत
इस अभ्यास का वैश्विक राजनीति पर भी असर है. रूस पहले ही अमेरिका, यूरोप और NATO के साथ कई मोर्चों पर टकराव की स्थिति में है. ईरान पश्चिमी प्रतिबंधों और अमेरिका की संभावित दखलअंदाजी के बीच आंतरिक विरोध और प्रदर्शन का सामना कर रहा है. चीन भी अमेरिका के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में उलझा हुआ है. ऐसे में इस चार देशों का समुद्री सहयोग अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि वे सामरिक मोर्चे पर भी एकजुट हैं और सामरिक शक्ति प्रदर्शन कर सकते हैं.
ये भी पढ़ें- Grok AI से आपकी प्राइवेसी को खतरा? जानिए X पर कैसे इस्तेमाल होता है आपका डेटा और कैसे करें इसे सुरक्षित