अमेरिका और इजराइल नहीं, इन 3 सुपरपावर देशों ने दी ईरान को धमकी

तेहरान का विवादित परमाणु कार्यक्रम एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है. समय बीतने के साथ स्थिति और पेचीदा होती जा रही है, लेकिन मुस्लिम देशों की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं दिखी है. 

Britain france and germany warns iran on nuclear program
Image Source: Ai

तेहरान का विवादित परमाणु कार्यक्रम एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है. समय बीतने के साथ स्थिति और पेचीदा होती जा रही है, लेकिन मुस्लिम देशों की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं दिखी है. 

हैरानी की बात यह है कि इस बार न तो इज़राइल ने कोई धमकी दी और न ही अमेरिका ने कोई खुला बयान दिया. इसके बावजूद ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे तीन बड़े शक्तिशाली देशों ने ईरान को साफ चेतावनी दे दी है. अगर संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी संगठन (IAEA) के साथ बातचीत जल्द शुरू नहीं हुई, तो ईरान पर फिर से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू होंगे.

स्नैपबैक प्रक्रिया का संकेत

ये तीनों देश, जिन्हें सामूहिक रूप से E3 कहा जाता है, पहले ही संयुक्त राष्ट्र को पत्र भेजकर अपना इरादा जता चुके हैं. इस पत्र में लिखा है कि अगर तेहरान ने तय समय सीमा के भीतर अपने वादों का पालन नहीं किया, तो वे स्नैपबैक प्रक्रिया लागू करने के लिए तैयार हैं. इस प्रक्रिया के तहत किसी भी पश्चिमी देश की पहल पर संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रतिबंध स्वतः बहाल हो सकते हैं. फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो ने यह पत्र सार्वजनिक करते हुए कहा कि E3 का लक्ष्य साफ है. ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना. जर्मनी और ब्रिटेन के शीर्ष राजनयिकों ने भी इस पर हस्ताक्षर किए.

तेहरान का पलटवार और उम्मीदें

ईरान ने इस चेतावनी पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसे उम्मीद है E3 देश अपने "गैर-रचनात्मक" रुख पर पुनर्विचार करेंगे. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघाई के मुताबिक, हालात को बेहतर बनाने के लिए संवाद जरूरी है. हालांकि, युद्ध के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच नए परमाणु समझौते पर बातचीत ठप है. तेहरान ने हमलों के बाद IAEA के साथ आधिकारिक सहयोग भी निलंबित कर दिया था. इस हफ्ते IAEA का एक प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचा, लेकिन उसने किसी भी परमाणु संयंत्र का निरीक्षण नहीं किया, जिससे सहयोग बहाली के संकेत कमजोर पड़ गए.

बढ़ता दबाव और संभावित रास्ता

जुलाई में इस्तांबुल में हुई एक अहम बैठक में मौजूद एक राजनयिक के मुताबिक, अगर E3 में से कोई भी देश स्नैपबैक का इस्तेमाल करता है, तो ईरान पर तुरंत पुराने प्रतिबंध लागू हो जाएंगे. हालांकि, अगर तेहरान IAEA के साथ सहयोग बहाल करता है और अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को लेकर वैश्विक चिंताओं को दूर करता है, तो इस प्रक्रिया को टाला भी जा सकता है. अतीत में भी ईरान ने वार्ता में दबाव बनाने के लिए IAEA निरीक्षणों को सीमित किया था.अब सवाल यह है कि क्या तेहरान बातचीत की मेज पर वापस आएगा, या फिर अगस्त 2025 के अंत तक E3 देशों की चेतावनी एक वास्तविक कदम में बदल जाएगी और दुनिया एक बार फिर ईरान पर कठोर आर्थिक प्रतिबंधों की वापसी देखेगी.

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