ब्रिटेन के साथ हो गई डील...भारत को जल्द मिलेगी LMM मिसाइल, जानें ताकत

भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. दोनों देशों ने हाल ही में एक बड़े रक्षा सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत ब्रिटेन भारत को लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल्स (LMM) की आपूर्ति करेगा.

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भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. दोनों देशों ने हाल ही में एक बड़े रक्षा सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत ब्रिटेन भारत को लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल्स (LMM) की आपूर्ति करेगा. इस डील की कुल कीमत 468 मिलियन डॉलर यानी करीब 4155 करोड़ रुपये बताई गई है. इस समझौते की घोषणा उस वक्त हुई जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर भारत दौरे पर थे और मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात हुई.


थेल्स यूके (Thales UK) द्वारा विकसित यह मिसाइल प्रणाली, मल्टी-रोल क्षमता से लैस है और इसका उपयोग वायु और जमीनी खतरों के खिलाफ किया जा सकता है. इसे मार्टलेट मिसाइल के नाम से भी जाना जाता है. यह मिसाइल ड्रोन, हल्के बख्तरबंद वाहनों, हेलिकॉप्टरों और छोटी नौकाओं के खिलाफ कारगर है.

यह मिसाइल:

  • 13 किलोग्राम वजनी है
  • इसकी गति 1.5 मैक है
  • यह 6 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है
  • लेज़र बीम गाइडेंस पर आधारित है. इसे सैनिक द्वारा कंधे से, व्हीकल-माउंटेड सिस्टम, हेलिकॉप्टर, और नौसैनिक जहाजों से भी लॉन्च किया जा सकता है. 2019 से ब्रिटिश सेना की सेवा में शामिल यह मिसाइल यूक्रेन युद्ध के दौरान रूसी बलों के खिलाफ भी इस्तेमाल हो चुकी है, जिससे इसकी प्रभावशीलता का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परीक्षण हो चुका है.

ब्रिटेन को भी मिला लाभ

इस डील से न केवल भारत को अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम मिलेगा, बल्कि ब्रिटेन के लिए भी यह आर्थिक और औद्योगिक रूप से लाभदायक सौदा साबित हुआ है. ब्रिटिश सरकार के अनुसार, उत्तरी आयरलैंड स्थित थेल्स फैक्ट्री में लगभग 700 नौकरियां इस सौदे के चलते बनी रहेंगी. साथ ही, यूक्रेन को भी यह मिसाइलें एक अलग समझौते के तहत ब्रिटेन द्वारा प्रदान की जा रही हैं.

भारत के आत्मनिर्भर डिफेंस विजन को बल

इस रक्षा करार को लेकर भारत सरकार ने एक संयुक्त बयान में कहा कि यह डील देश की वायु सुरक्षा क्षमता को आधुनिक बनाएगी. साथ ही, यह 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे भारत की वर्तमान और भविष्य की रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी.

नौसेना के लिए भी नई शुरुआत

ब्रिटेन और भारत के बीच नौसेना प्लेटफॉर्म्स के लिए इलेक्ट्रिक इंजन की सप्लाई को लेकर भी एक नई डील हुई है, जिसकी शुरुआती कीमत ही 250 मिलियन पाउंड है. यह रक्षा सहयोग के क्षेत्र में एक नया माइलस्टोन माना जा रहा है.

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