Canada Philippines Friendship: कनाडा और फिलीपींस ने दक्षिण चीन सागर में सुरक्षा और सैन्य सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते का नाम “स्टेटस ऑफ विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट (Status of Visiting Forces Agreement- VFA)” है. समझौते पर फिलीपींस के रक्षा मंत्री गिल्बर्टो टियोडोरो जूनियर और कनाडा के रक्षा मंत्री डेविड मैकगिन्टी ने मनीला, फिलीपींस में हस्ताक्षर किए.
इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य प्रशिक्षण और अभ्यास बढ़ाना, आपसी सुरक्षा सहयोग मजबूत करना और किसी भी संकट या खतरनाक स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना है.
समझौते की मुख्य बातें
कनाडाई रक्षा मंत्री डेविड मैकगिन्टी ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों को संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने, रणनीतिक जानकारी साझा करने और आपदा या इमरजेंसी की स्थिति में एक साथ काम करने की क्षमता देगा.
फिलीपींस के रक्षा मंत्री टियोडोरो ने कहा कि यह कदम एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अहम है. उन्होंने चीन की बढ़ती सैन्य और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा को देखते हुए कहा कि कुछ देशों का उद्देश्य अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करना है, और फिलीपींस और उसके सहयोगी इसका मुकाबला करने के लिए तैयार हैं.
कनाडा और पश्चिमी देशों की रणनीति
कनाडा और अन्य पश्चिमी देश पिछले कुछ वर्षों से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं. इसका मकसद न केवल क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है, बल्कि व्यापार, निवेश और समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करना है.
फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने इस नीति का समर्थन किया है. उनका मानना है कि देश की नौसेना को मजबूत करके दक्षिण चीन सागर में चीन जैसी क्षेत्रीय ताकतों से निपटा जा सकता है.
चीन की प्रतिक्रिया और विवाद की पृष्ठभूमि
इस समझौते पर चीन ने अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. हालांकि, चीन पहले भी फिलीपींस पर आरोप लगा चुका है कि वह दक्षिण चीन सागर में तनाव बढ़ाने वाला देश है.
दक्षिण चीन सागर पर विवाद लंबे समय से चल रहा है. चीन लगभग पूरे समुद्र पर दावा करता है, जबकि 2016 में अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत चीन के दावे को अवैध घोषित किया था. चीन ने इस निर्णय को मानने से इनकार कर दिया और समय-समय पर फिलीपींस के जहाजों के खिलाफ वॉटर कैनन और अन्य टकराव की रणनीति अपनाई है.
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों के साथ सहयोग
फिलीपींस ने इस तरह के सुरक्षा समझौते पहले भी कुछ देशों के साथ किए हैं.
इसके अलावा, जापान और न्यूजीलैंड के साथ भी इसी तरह के समझौते हुए हैं. फिलहाल फ्रांस, सिंगापुर, ब्रिटेन, जर्मनी और भारत के साथ भी सहयोग बढ़ाने की बातचीत चल रही है.
स्कारबोरो शोल विवाद और कनाडा का सहयोग
हाल ही में ASEAN की बैठक में, फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने चीन की उस घोषणा की निंदा की थी जिसमें स्कारबोरो शोल आइलैंड को नेचर रिजर्व बनाने की बात कही गई थी. यह आइलैंड दक्षिण चीन सागर में स्थित है और फिलीपींस और चीन दोनों इसके मालिक होने का दावा करते हैं.
फिलीपींस का तर्क है कि चीन इस कदम के जरिए स्थानीय मछुआरों के अधिकारों को बाधित कर रहा है. कनाडा ने भी चीन के इस कदम की आलोचना की और फिलीपींस को सुरक्षा तकनीक प्रदान की, जिससे उपग्रह निगरानी के जरिए छिपे हुए जहाजों को ट्रैक किया जा सके.
सुरक्षा और सामरिक महत्व
इस समझौते के माध्यम से फिलीपींस और कनाडा दोनों अपने समुद्री और रणनीतिक हितों की रक्षा करने में सक्षम होंगे.
यह समझौता स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि फिलीपींस और कनाडा दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती ताकत और गतिविधियों का जवाब देने के लिए रणनीतिक सहयोग बढ़ा रहे हैं.
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