कनाडा में भारतीय मूल के नागरिकों और कारोबारियों के बीच डर और बेचैनी का माहौल है. हाल के महीनों में वहां एक्सटॉर्शन यानी उगाही से जुड़े कई मामलों ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है. स्थिति तब और गंभीर हो गई जब मशहूर कॉमेडियन कपिल शर्मा के कैप्स कैफे में भी फायरिंग की घटना सामने आई. इस वारदात ने कनाडा में फैले आपराधिक नेटवर्क और विदेशी गैंगों की सक्रियता को उजागर कर दिया.
अब इस पूरे मामले में कनाडा सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. कनाडा बॉर्डर सिक्योरिटी एजेंसी (CBSA) ने न सिर्फ कुछ विदेशी नागरिकों को देश से बाहर किया है, बल्कि दर्जनों संदिग्धों पर भी जांच का शिकंजा कस दिया है.
कनाडा से तीन विदेशी नागरिकों को किया गया डिपोर्ट
कनाडा बॉर्डर सिक्योरिटी एजेंसी ने हाल ही में तीन विदेशी नागरिकों को देश से बाहर निकाला है. इन पर आरोप है कि ये लोग कनाडा में उगाही और गैंगवार से जुड़ी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे. हालांकि, इन तीनों के नाम या पहचान का खुलासा नहीं किया गया है. एजेंसी ने इसके साथ ही 78 अन्य विदेशी नागरिकों की पहचान की है, जिन पर संगठित अपराध से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने का संदेह है. इनके खिलाफ अब इमिग्रेशन जांच शुरू हो चुकी है. यह कार्रवाई ब्रिटिश कोलंबिया पुलिस द्वारा गठित "एक्सटॉर्शन टास्क फोर्स" के अंतर्गत की जा रही है, जो बीते कुछ महीनों से देशभर में चल रही फायरिंग और धमकी की घटनाओं पर काम कर रही है.
लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर कसता शिकंजा
इन मामलों के पीछे सबसे ज्यादा नाम सामने आ रहा है लॉरेंस बिश्नोई गैंग का. कुछ समय पहले ही कनाडा सरकार ने इस गिरोह को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था, लेकिन इसके बावजूद इसकी आपराधिक गतिविधियां थमी नहीं हैं. ओंटारियो और ब्रैम्पटन जैसे इलाकों में, जहां बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं, बिश्नोई गैंग और उसके सहयोगी गोल्डी बराड़ तथा रोहित गोडारा के नेटवर्क तेजी से फैल रहे हैं. हाल ही में ब्रिटिश कोलंबिया के एबॉट्सफोर्ड में भारतीय मूल के बिजनेसमैन दर्शन सिंह साहसी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस हत्या की जिम्मेदारी खुद बिश्नोई गैंग ने ली थी.
फायरिंग, धमकी और क्रिप्टोकरेंसी में वसूली
कनाडा पुलिस की रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ सरे (Surrey) इलाके में ही साल 2025 में 65 एक्सटॉर्शन केस दर्ज किए गए. इनमें से 35 मामलों में फायरिंग की घटनाएं शामिल थीं. पुलिस के मुताबिक, अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए कारोबारियों से क्रिप्टोकरेंसी में पैसे की मांग करते हैं. जब पीड़ित पैसे देने से इनकार करते हैं, तो उनके घरों, दुकानों या कैफे पर फायरिंग की जाती है – ताकि डर का माहौल बनाया जा सके. इसी पैटर्न पर कपिल शर्मा के कैप्स कैफे में भी गोलीबारी की गई थी. हालांकि उस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन घटना ने प्रवासी भारतीयों में गहरी चिंता पैदा कर दी.
प्रवासी भारतीयों में बढ़ी दहशत
कनाडा के कई शहरों, खासकर ओंटारियो, ब्रैम्पटन और सरे जैसे इलाकों में भारतीयों की बड़ी आबादी है. ये इलाक़े अब गैंगवार और उगाही के मामलों से जूझ रहे हैं. लगातार हो रही फायरिंग और धमकियों के चलते प्रवासी समुदाय में दहशत का माहौल है. कई बिजनेस ओनर्स ने स्थानीय प्रशासन से सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है. वहीं, कुछ भारतीय संगठनों ने भारतीय दूतावास से भी दखल की अपील की है ताकि इन गैंगों पर सख्त कार्रवाई हो सके.
सरकार की सख्त निगरानी
कनाडा की सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि देश की शांति भंग करने वाले किसी भी विदेशी नागरिक को बख्शा नहीं जाएगा.CBSA ने बयान जारी करते हुए कहा है. “जो भी व्यक्ति कनाडा में रहते हुए संगठित अपराध या हिंसा को बढ़ावा देगा, उसे डिपोर्ट किया जाएगा, चाहे उसकी राष्ट्रीयता कुछ भी हो.. साथ ही, पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसियों ने मिलकर ऐसे नेटवर्क की पहचान शुरू कर दी है जो भारतीय गैंग्स से जुड़े हैं और कनाडा में बैठे होकर अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं.
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