Sheikh Hasina: बंगबंधु की बेटी और बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने स्पष्ट कर दिया है कि वे तभी अपने वतन वापस आएंगी जब देश में भागीदारी वाले लोकतंत्र की बहाली होगी, उनकी पार्टी आवामी लीग पर लगे प्रतिबंध हटेंगे और स्वतंत्र, निष्पक्ष व समावेशी चुनाव कराए जाएँगे. भारत में गुप्त स्थान पर रह रहीं 78 वर्षीय हसीना ने यह बात PTI को दिए ई-मेल इंटरव्यू में कही.
हसीना ने कहा कि उनकी यह माँग बांग्लादेश के लोगों की इच्छाओं के अनुकूल है. उन्होंने वर्तमान अंतरिम सरकार और उसके प्रमुख नॉबेल विजेता मोहम्मद यूनुस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी नीतियों ने भारत-बांग्लादेश के पारंपरिक संबंधों को ठेस पहुंचाई और देश में चरमपंथी ताकतों को सशक्त किया.
वापसी की शर्तें: क्या चाहिए शेख हसीना को?
हसीना ने तीन स्पष्ट शर्तें रखीं:
उनका कहना था कि जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होंगी, वे स्वदेश लौटकर किसी भी तरह की राजनीतिक सक्रियता में भाग नहीं लेंगी.
इस्तीफा और भारत आगमन
शेख हसीना ने 5 अगस्त 2024 को सत्ता छोड़ी थी, जब हफ्तों तक चले हिंसक विरोध कार्यक्रमों के बाद भारी सामाजिक-राजनीतिक दबाव बना. तत्कालीन परिस्थितियों में उन्होंने इस्तीफा देकर भारत शरण ली थी. इसके बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपा गया.
अपनी सरकार के हालात पर स्वीकारोक्ति
हसीना ने माना कि उनकी सरकार ने हालात पर काबू खोया था, पर उन्होंने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन मुख्यतः छात्र नेताओं के नाम पर चलाए गए, जबकि हकीकत में ये पुराने राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा भड़काए गए थे. उन्होंने चुनाव बहिष्कार की चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि आवामी लीग के बिना कोई चुनाव वैध नहीं माना जा सकता, “हम करोड़ों लोगों का समर्थन रखते हैं; हमारे बिना चुनाव करना देश के लिए बीमारी जैसा होगा.”
“मूर्खतापूर्ण और आत्मघाती नीतियाँ”
हसीना ने कहा कि भारत हमेशा बांग्लादेश का सबसे अहम अंतरराष्ट्रीय साझेदार रहा है, पर यूनुस सरकार की नीतियों ने इस रिश्ते को खतरे में डाल दिया. हसीना ने यूनुस की भारत-विरोधी नीतियों की आलोचना करते हुए बताया कि वे एक कमजोर और बिना जनसमर्थन वाले नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो अब कट्टरपंथी तत्वों पर निर्भर होता जा रहा है. उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिमी उदारवादी प्रारम्भिक तौर पर यूनुस का समर्थन कर रहे थे, पर अब उसके कुछ फैसलों और अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव को देखकर उनका भरोसा कम होता दिख रहा है.
अंतरराष्ट्रीय न्याय में पेश होने की तैयारी
अभी चल रहे मुकदमों पर हसीना ने कहा कि वे अन्तरराष्ट्रीय निगरानी व इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) में भी पेश होने के लिए तैयार हैं, मगर चुनौती यह है कि उन्हें घरेलू न्यायप्रणाली में निष्पक्षता नहीं दिखती. उन्होंने बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण को “कंगारू कोर्ट” करार दिया और कहा कि वह राजनीतिक विरोधियों के प्रभाव में है. हसीना ने सफाई दी कि यदि मामला अंतरराष्ट्रीय अदालतों में जाएगा तो उन्हें बरी कर दिया जाएगा.
भारत के प्रति आभार और वापसी की संभावनाएँ
हसीना ने भारत सरकार और जनता के प्रति कृतज्ञता जताई और कहा कि भारत की मेहमाननवाज़ी के लिए वे आभारी हैं. वापसी की राह उसी दिन खुल सकती है जब राजनीतिक वातावरण में ऐसा बदलाव आए कि आवामी लीग को भागीदारी का मौका मिले और चुनाव के लिए निष्पक्ष माहौल सुनिश्चित हो.
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