Naxalite Surrender In Kanker: छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित इलाकों से बड़ी खबर आई है, जहां लगभग 100 नक्सलियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है. यह कदम लंबे समय से चल रहे माओवादी संघर्ष में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है. आइए विस्तार से जानते हैं इस आत्मसमर्पण के पीछे की पूरी कहानी.
उत्तर बस्तर के कांकेर जिले में लगभग 100 नक्सलियों ने हथियार डालकर सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. इस बड़ी संख्या में टॉप लीडर राजू सलाम, कमांडर प्रसाद और मीना जैसे प्रमुख माओवादी शामिल हैं. जंगलों से बाहर आकर इन नक्सलियों ने कामतेड़ा बीएसएफ कैंप में अपना आत्मसमर्पण दर्ज कराया. सुरक्षा कारणों से बीएसएफ कैंप में हाई अलर्ट जारी किया गया है.
In a major setback for #Maoists, over 100 Naxalites arrived by bus in Antagarh (Kanker) to surrender before security forces.
— Ashish (@KP_Aashish) October 15, 2025
Reports say the group includes top cadre Rajju Salam (DVCM) and North Bastar Division chief Rajman, bringing along 39 weapons, including automatics. Bastar… pic.twitter.com/eqkr7WoG5Y
सुरक्षाबलों के लिए बड़ी सफलता
राजू सलाम डिवीजनल कमेटी मेंबर (DVCM) और कंपनी नंबर 5 के कमांडर थे. वे रावघाट एरिया में सक्रिय रहे और पिछले 20 वर्षों में कांकेर में हुई कई बड़ी घटनाओं के मास्टरमाइंड माने जाते हैं. इस आत्मसमर्पण से इलाके में नक्सलवाद खत्म होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं. फिलहाल कांकेर पुलिस सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों की पहचान में लगी हुई है और उन्हें जल्द ही जिला या संभागीय मुख्यालय में मीडिया के सामने पेश किया जाएगा.
महाराष्ट्र में भी 60 नक्सलियों का आत्मसमर्पण
बता दें, मंगलवार को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में भी 6 करोड़ रुपए के इनामी और पोलित ब्यूरो सदस्य भूपति ने अपने 60 साथियों के साथ हथियार डालकर सरेंडर किया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने यह नक्सली हथियार सौंपकर मुख्यधारा में लौटे.
भूपति उर्फ मोजुल्ला वेणुगोपाल राव एक कुख्यात माओवादी नेता हैं, जो 1980 के दशक से माओवादी संगठन से जुड़े हुए थे. वे तेलंगाना के करीब नगर के रहने वाले हैं और छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश तथा ओडिशा सहित कई राज्यों में मोस्ट वांटेड थे. छत्तीसगढ़ सरकार ने भूपति पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपए का इनाम घोषित किया था, जबकि अन्य राज्यों के इनाम को मिलाकर यह रकम 6 करोड़ से अधिक हो जाती है.
सुकमा में 27 नक्सलियों ने हथियार डाले
सुकमा जिले में 14 अक्टूबर को 27 नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण किया है. इनमें 10 महिलाएं और 17 पुरुष शामिल हैं. इन सभी नक्सलियों पर कुल 50 लाख रुपए का इनाम था. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली पीएलजीए बटालियन नंबर 01 और रिजनल मिलिट्री कंपनी के हार्डकोर माओवादी थे.
उन्होंने पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण और सीआरपीएफ, कोबरा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के सामने हथियार डालकर अपनी आत्मसमर्पण की औपचारिकता पूरी की.
नक्सलियों के आत्मसमर्पण के पीछे क्या वजहें हैं?
माओवादी संगठनों पर सुरक्षा बलों का लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है. छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लागू की गई “छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति 2025” और “नियद नेल्ला नार” योजना भी नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर रही हैं.
नक्सलियों ने बताया है कि संगठन की अमानवीय विचारधारा और बढ़ता दबाव उन्हें इस कदम के लिए मजबूर कर रहा है. अब वे अपने परिवारों के साथ सामान्य जीवन बिताना चाहते हैं और सरकार द्वारा दी जाने वाली पुनर्वास और प्रोत्साहन राशि का लाभ उठाना चाहते हैं.
सरकार की ओर से दी जा रही सहायता
छत्तीसगढ़ सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 50-50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने का फैसला किया है. इसके साथ ही उन्हें पुनर्वास की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे सामाजिक और आर्थिक रूप से मुख्यधारा में पुनः स्थापित हो सकें. सुरक्षा बल भी इस प्रक्रिया को बेहद संवेदनशीलता से निभा रहे हैं ताकि नक्सलियों को भविष्य में किसी प्रकार की सुरक्षा खतरे का सामना न करना पड़े.
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