मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में जहरीले कफ सिरप के कारण हुई 25 बच्चों की मौत ने देशभर में दवा नियामक व्यवस्था को झकझोर दिया है. इस दर्दनाक हादसे के बाद केंद्र सरकार ने भारत की दवा नीति में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए हर कफ सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol - DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल (Ethylene Glycol - EG) की जांच को अनिवार्य कर दिया है.
यह निर्णय न केवल मौजूदा संकट से निपटने के लिए लिया गया है, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए नीति स्तर पर की गई एक अहम पहल मानी जा रही है.
जानें क्या है पूरा मामला?
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक कफ सिरप, कोल्ड्रिफ (Coldrif), पीने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी. कुछ ही दिनों में 25 बच्चों की जान चली गई, और कई अन्य गंभीर रूप से बीमार हो गए. जांच में सामने आया कि इस सिरप के बैच नंबर SR-13 में भारी मात्रा में डायथिलीन ग्लाइकॉल मौजूद था.
46.28% DEG की पुष्टि
मध्यप्रदेश के ड्रग कंट्रोलर दिनेश श्रीवास्तव द्वारा दिल्ली भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया कि कोल्ड्रिफ सिरप के नमूनों में 46.28% डायथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया, जो कि अत्यंत विषैला और जानलेवा होता है. दरअसल, यह केमिकल मानव शरीर के लिए घातक है और इसका सेवन गुर्दे फेल होने, न्यूरोलॉजिकल डैमेज और मौत का कारण बन सकता है.
अब DEG और EG की जांच अनिवार्य
छिंदवाड़ा से रिपोर्ट मिलने के सिर्फ 24 घंटे के भीतर, यानी 10 अक्टूबर 2025 को, औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू की. इसके बाद इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (IPC) ने Indian Pharmacopoeia 2022 (9th Edition) में तात्कालिक संशोधन करते हुए यह अनिवार्य किया कि, "अब से देशभर में बनने वाले हर ओरल लिक्विड सिरप के फॉर्मूलेशन में DEG और EG की जांच फिनिश्ड प्रोडक्ट के स्तर पर अनिवार्य होगी."
नई सीमा तय: अधिकतम 0.1%
संशोधित मानकों के अनुसार, यदि किसी सिरप में DEG या EG की मात्रा 0.1% से अधिक पाई जाती है, तो उसे "Not of Standard Quality (NSQ)" घोषित कर दिया जाएगा.
बिना किसी औपचारिक आदेश के रोक
छिंदवाड़ा कांड के बाद, मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में चार प्रकार की कफ सिरप की आपूर्ति पर चुपचाप रोक लगा दी है. इन सिरप्स को MPPHSCL (मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन) के सॉफ्टवेयर सिस्टम से हटा दिया गया है. न तो कोई सार्वजनिक सूचना जारी की गई, और न ही कोई लिखित प्रतिबंध, लेकिन सभी स्टोर रूम में इन सिरप की 5 लाख से ज्यादा बोतलें अब ठंडी पड़ी हैं.
NABL लैब में हो रही जांच
इन सिरप्स के सैंपल अब NABL (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) द्वारा मान्यता प्राप्त लैब में भेजे गए हैं. रिपोर्ट आने तक किसी भी अस्पताल में इनका उपयोग नहीं होगा.
कौन-कौन सी सिरपें हटाई गईं?
इन सभी सिरप में मुख्य रूप से डेक्स्ट्रोमेथॉर्फन और क्लोर्फेनिरामीन का संयोजन पाया जाता है, जो सामान्य सर्दी-खांसी में प्रयोग होते हैं:
राजस्थान में भी एक बच्चा मौत का शिकार
मध्यप्रदेश के बाद राजस्थान में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है. वहां भी सरकारी सप्लाई में इन्हीं फार्मूले वाली सिरप पाए गए थे. सिरप के सेवन के बाद एक बच्चे की मौत हुई, और कुछ चिकित्सक भी बीमार पड़ गए. इसके बाद वहां भी चार सिरप के वितरण पर रोक लगाई गई है और सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं. फिलहाल तीन सिरप की रिपोर्ट ठीक आई है, लेकिन अंतिम रिपोर्ट का इंतजार जारी है.
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