डॉलर को झटका... ट्रंप की टूटेगी हेकड़ी! चीन के साथ मिलकर करेगा भारत ये काम

अमेरिका द्वारा भारत, चीन और अन्य देशों पर लगाए गए टैरिफ का असर अब वैश्विक व्यापार पर साफ़ दिखाई देने लगा है. इसके जवाब में भारत और चीन मिलकर एक वैकल्पिक रास्ता अपनाने की तैयारी में हैं.

China and India will develop new payment system dollar will face problem
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अमेरिका द्वारा भारत, चीन और अन्य देशों पर लगाए गए टैरिफ का असर अब वैश्विक व्यापार पर साफ़ दिखाई देने लगा है. इसके जवाब में भारत और चीन मिलकर एक वैकल्पिक रास्ता अपनाने की तैयारी में हैं, जो न केवल अमेरिकी दबाव को कम करेगा, बल्कि वैश्विक आर्थिक संतुलन में भी बड़ा बदलाव ला सकता है.

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के तिनजियान में आयोजित SCO (शंघाई सहयोग संगठन) समिट में शामिल हुए. इस दौरान उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हुई. तीनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि एशियाई शक्तियां अब अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देने के लिए एकजुट हो रही हैं.

टैरिफ के खिलाफ नई आर्थिक चाल

अमेरिका की टैरिफ नीति के चलते भारत और चीन के व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ा है. अमेरिका ने भारत पर 50% तक टैरिफ लगाया है, जबकि चीन भी ऐसे ही दबाव का सामना कर रहा है. इन परिस्थितियों में भारत और चीन अब डॉलर पर आधारित वैश्विक पेमेंट सिस्टम की जगह एक नया भुगतान तंत्र विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं. एससीओ सम्मेलन के दौरान ट्रेड से जुड़े लेनदेन के लिए वैकल्पिक करेंसी सिस्टम को अपनाने पर चर्चा हुई. इसमें रूस की भागीदारी भी संभावित मानी जा रही है.


स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर मत्तेओ माज्जियोरी के अनुसार, अब आर्थिक संसाधन और वित्तीय नेटवर्क भी राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि जैसे चीन दुर्लभ खनिजों पर नियंत्रण रखता है, वैसे ही अमेरिका डॉलर और अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम को दबाव बनाने के लिए प्रयोग करता है.

क्यों जरूरी है नया पेमेंट सिस्टम?

भारत और चीन दोनों ही वैश्विक व्यापार में बड़ी भूमिका निभाते हैं, लेकिन जब तक डॉलर की पकड़ बनी रहेगी, अमेरिका का प्रभाव भी बना रहेगा. इसलिए नई भुगतान प्रणाली विकसित करना एक रणनीतिक कदम है, जो इन देशों को आर्थिक स्वतंत्रता और अधिक वैश्विक प्रभाव दिला सकता है.

अमेरिका के लिए खतरे की घंटी?

यदि भारत और चीन मिलकर डॉलर के विकल्प के रूप में नया पेमेंट सिस्टम पेश करते हैं, तो यह अमेरिका की मौजूदा वित्तीय ताकत को कमजोर कर सकता है. आज भी ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय व्यापार डॉलर में होता है. ऐसे में किसी भी वैकल्पिक व्यवस्था का असर वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा, और अमेरिका की मुद्रा की स्थिति को चुनौती मिल सकती है.

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