चीन में हुए कथित उत्पीड़न के बाद अब अरुणाचल प्रदेश की पेमा वांग थोंगडोक ने चुप्पी तोड़ते हुए उन लोगों को सख्त संदेश दिया है जो सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बना रहे थे. उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा उठाया गया हर कदम पूरे देश के लिए होता है, न कि किसी एक व्यक्ति के लिए. इस बयान से उन्होंने देश की एकता और सम्मान को लेकर मजबूत संदेश देने की कोशिश की है.
पेमा वांग थोंगडोक ने दावा किया कि 21 नवंबर को लंदन से जापान जाते समय उनका शंघाई एयरपोर्ट पर ट्रांजिट था. इसी दौरान चीनी अधिकारियों ने उन्हें करीब 18 घंटे तक रोके रखा.सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने उनका भारतीय पासपोर्ट मानने से ही इनकार कर दिया, क्योंकि उसमें जन्मस्थान अरुणाचल प्रदेश लिखा था—जिसे चीन अपना हिस्सा बताता है.
आप सबका धन्यवाद, लेकिन ट्रोल्स के लिए मेरे पास समय नहीं
थोंगडोक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट कर उन सभी लोगों का आभार जताया जिन्होंने उनका समर्थन किया.उन्होंने साफ कहा मैं एक्स पर नई हूं और बहुत एक्टिव नहीं रहती. मैं वित्तीय सेवाओं में उच्च-स्तरीय पद पर काम करती हूं, इसलिए ट्रोल्स को जवाब देने का समय मेरे पास नहीं है. उन्होंने यह भी लिखा कि जो लोग मुद्दे को समझते हैं, वही असल में मायने रखते हैं.
भारत सरकार की कार्रवाई पूरे राष्ट्र के लिए होती है
पेमा ने यह स्पष्ट किया कि वह भारत में नहीं रहतीं, इसलिए भारत सरकार का कोई भी कदम व्यक्तिगत रूप से उनके लिए नहीं होता.उन्होंने कहा कि भारत सरकार जो भी करती है, वह यहां रहने वाले भारतीयों और अरुणाचलवासियों के हित में करती है. हम एक राष्ट्र हैं और एक-दूसरे के लिए खड़े रहते हैं. उनका यह बयान ट्रोल्स और आलोचकों के लिए एक सीधा संदेश था कि इस मुद्दे को लेकर देश की एकता पर सवाल नहीं उठना चाहिए.
शंघाई में वास्तव में क्या हुआ?
थोंगडोक ने पूरी घटना को भारत की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया. उनका कहना है कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट को “अमान्य” बताया इसका कारण जन्मस्थान अरुणाचल प्रदेश होना बताया और फिर उन्हें घंटों कस्टडी में बिठाए रखा यह घटना न केवल उनके लिए अपमानजनक थी बल्कि भारत की संप्रभुता पर सवाल उठाने वाली भी थी.
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