अमेरिका से तनाव के बीच चीन ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ, भारत को देगा कीमती सामग्री और ये खास मशीन

India China: अमेरिका के साथ चल रहे तनाव के बीच चीन ने भारत के साथ संबंध सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है. चीन ने भारत को रेयर अर्थ मटेरियल, टनल बोरिंग मशीन और उर्वरक (फर्टिलाइजर) की आपूर्ति का भरोसा दिया है.

China assures India supply of fertilizer rare earths and tunnel machines EAM Jaishankar meets Wang Yi
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India China: अमेरिका के साथ चल रहे तनाव के बीच चीन ने भारत के साथ संबंध सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है. चीन ने भारत को रेयर अर्थ मटेरियल, टनल बोरिंग मशीन और उर्वरक (फर्टिलाइजर) की आपूर्ति का भरोसा दिया है. चीनी विदेश मंत्री वांग यी की नई दिल्ली यात्रा के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात हुई, जिसमें व्यापारिक समस्याओं के समाधान और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई. इस पहल से दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है.

भारत की तीन बड़ी समस्याओं का समाधान

वांग यी ने जयशंकर को आश्वासन दिया कि चीन भारत की प्रमुख जरूरतों रेयर अर्थ मटेरियल, फर्टिलाइजर और सुरंग खोदने वाली मशीनों की सप्लाई सुनिश्चित करेगा. दरअसल, अमेरिका के साथ ट्रेड विवाद के चलते चीन ने रेयर अर्थ मटेरियल के निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे वैश्विक बाजार प्रभावित हुआ है. ऐसे में चीन का यह कदम भारत के लिए राहत की खबर माना जा रहा है.

रेयर अर्थ मटेरियल का महत्व

रेयर अर्थ मटेरियल तकनीकी दुनिया का अहम हिस्सा हैं. इनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और भारी औद्योगिक उपकरणों में होता है. भारत जैसे देश जो उच्च तकनीक उत्पादों के विकास पर जोर दे रहे हैं, उनके लिए इन सामग्रियों की उपलब्धता बहुत जरूरी है. चीन की यह आपूर्ति भारत की टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रगति के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी.

वांग यी की भारत यात्रा का महत्व

चीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि वांग यी की यह यात्रा पिछले साल चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए समझौते को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इस दौरे के दौरान वांग यी प्रधानमंत्री मोदी से भी मुलाकात करेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग के नए द्वार खुलने की उम्मीद है.  

मीटिंग पर क्या बोले विदेश मंत्री जयशंकर

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, "जब दुनिया के दो सबसे बड़े देश मिलते हैं तो यह स्वाभाविक है कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर चर्चा होगी. हम एक निष्पक्ष, संतुलित और मल्टी-पोलर विश्व व्यवस्था चाहते हैं, जिसमें मल्टी-पोलर एशिया भी शामिल हो. वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना और उसे बढ़ाना भी जरूरी है.''

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