नई दिल्ली: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को प्रोत्साहन देने के लिए चल रही सब्सिडी योजनाएं अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार विवाद का विषय बन गई हैं. चीन ने इन योजनाओं को लेकर विश्व व्यापार संगठन (WTO) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है.
चीन का आरोप है कि भारत सरकार की EV सब्सिडी नीतियां भारतीय घरेलू कंपनियों को अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक लाभ देती हैं और इसका सीधा असर चीनी EV कंपनियों के भारत में कारोबार पर पड़ रहा है.
शिकायत का आधार: घरेलू कंपनियों को बढ़त
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि भारत द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों पर दी जा रही भारी सब्सिडी के कारण विदेशी कंपनियों, विशेष रूप से चीनी निर्माताओं, को नुकसान उठाना पड़ रहा है.
चीन के अनुसार:
चीन ने कहा है कि वह अपने उद्योगों के हितों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हरसंभव कदम उठाएगा.
भारत की EV सब्सिडी नीति:
भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं. इनमें शामिल हैं:
1. वाहन खरीद पर प्रत्यक्ष सब्सिडी
उदाहरण के लिए, देश में सबसे ज्यादा बिकने वाली इलेक्ट्रिक कार टाटा नेक्सॉन EV पर लगभग 46% तक की सब्सिडी उपलब्ध है, जो खरीदार और निर्माता दोनों को मिलती है.
2. कम टैक्स और रोड टैक्स छूट
EV पर GST केवल 5% है, जबकि पेट्रोल और डीज़ल वाहनों पर यह दर कहीं अधिक है.
कई राज्यों में EV पर रोड टैक्स या तो बहुत कम है या पूरी तरह माफ है.
3. PLI योजना के तहत उद्योगों को प्रोत्साहन
EV निर्माताओं को प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत उत्पादन बढ़ाने पर अतिरिक्त सरकारी सहायता मिलती है.
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर
भारत सरकार की रणनीति सिर्फ वाहन बेचने तक सीमित नहीं है. वह चार्जिंग स्टेशनों के नेटवर्क को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दे रही है:
PM e-Drive योजना के तहत:
व्यावसायिक संचालन शुरू होने के बाद शेष राशि.
सब्सिडी की समयसीमा:
भारत का उद्देश्य: हरित परिवहन को बढ़ावा
भारत सरकार की नीति का उद्देश्य है कि देश में पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली विकसित की जाए और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जाए. इसके लिए सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर EV को अपनाने के लक्ष्य तय किए हैं, जिसमें चार्जिंग सुविधाएं, वाहन निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला को भी शामिल किया गया है.