जापान की सीमा में घुसा चीन का हेलीकॉप्टर, टोक्यो ने लड़ाकू विमान पीछे लगाकर खूब दौड़ाया

पूर्वी चीन सागर का आकाश एक बार फिर राजनयिक तूफान की चपेट में है. बता दें कि दोनों देश एक-दूसरे पर हवाई क्षेत्र में घुसपैठ के गंभीर आरोप लगाते आ रहे हैं. यह हालिया विवाद ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देशों के बीच पहले से ही समुद्री सीमाओं को लेकर खींचतान बनी हुई है.

China helicopter entered Japans airspace Tokyo expressed strong objection
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पूर्वी चीन सागर का आकाश एक बार फिर राजनयिक तूफान की चपेट में है. बता दें कि दोनों देश एक-दूसरे पर हवाई क्षेत्र में घुसपैठ के गंभीर आरोप लगाते आ रहे हैं. यह हालिया विवाद ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देशों के बीच पहले से ही समुद्री सीमाओं को लेकर खींचतान बनी हुई है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल चीन के तटरक्षक बल से जुड़े एक हेलीकॉप्टर ने कथित तौर पर जापान के नियंत्रण वाले सेनकाकू द्वीपों के ऊपर उड़ान भरी. जापानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, हेलीकॉप्टर ने लगभग 15 मिनट तक जापानी हवाई क्षेत्र में रहकर उसकी संप्रभुता का उल्लंघन किया. टोक्यो ने इस पर तीखी आपत्ति जताई और बीजिंग स्थित चीनी दूतावास को अपना विरोध दर्ज कराया. इसके साथ ही जवाबी कदम उठाते हुए जापान ने अपने फाइटर जेट्स को अलर्ट पर डाल दिया.

लेकिन चीन ने न सिर्फ इस आरोप को खारिज किया, बल्कि पलटवार करते हुए दावा किया कि जापान के एक नागरिक विमान ने उनके दियाओयू द्वीप (जिन्हें जापान सेनकाकू कहता है) के आसमान में घुसपैठ की है. बीजिंग ने इस कृत्य पर असंतोष जताते हुए जापान पर क्षेत्रीय संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाया है.

यह घटनाक्रम संवेदनशील समुद्री इलाके में हुआ है. यह क्षेत्र दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से अहम है. यह समुद्री क्षेत्र एशिया में शक्ति संतुलन के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सैन्य और कूटनीतिक झड़पें केवल दोनों देशों के रिश्तों को नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को प्रभावित कर सकती हैं.

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