Yellow Sea में दबदबा कायम करने की कोशिश में चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के लिए बनी बड़ी चुनौती

China Live Fire Drill Yellow Sea: एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहले से मौजूद भू-राजनीतिक तनाव के बीच चीन एक और सैन्य गतिविधि शुरू करने जा रहा है. चीन की समुद्री सुरक्षा प्रशासन ने घोषणा की है कि येलो सी के उत्तरी हिस्से में मंगलवार से शुक्रवार तक लाइव-फायर सैन्य अभ्यास आयोजित किया जाएगा.

China Japan and South Korea in their attempt to establish dominance in the Yellow Sea
Image Source: Social Media

China Live Fire Drill Yellow Sea: एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहले से मौजूद भू-राजनीतिक तनाव के बीच चीन एक और सैन्य गतिविधि शुरू करने जा रहा है. चीन की समुद्री सुरक्षा प्रशासन ने घोषणा की है कि येलो सी के उत्तरी हिस्से में मंगलवार से शुक्रवार तक लाइव-फायर सैन्य अभ्यास आयोजित किया जाएगा. इस ड्रिल का उद्देश्य नौसैनिक तैयारी को मजबूत करना बताया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञ इसे क्षेत्रीय शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं.

लिआओनिंग प्रांत की दालियान मैरीटाइम अथॉरिटी द्वारा जारी नोटिस के अनुसार यह अभ्यास मंगलवार सुबह 8 बजे शुरू होकर शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक चलेगा. इस दौरान निर्धारित समुद्री क्षेत्र को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा और किसी भी प्रकार के जहाज को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी. अथॉरिटी के अनुसार, यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाया गया है ताकि अभ्यास के दौरान कोई जहाज खतरे में न आए और संभावित नुकसान से बचा जा सके.

चीन की रणनीतिक मंशा: नौसैनिक शक्ति को लगातार मजबूत करना

चीन पिछले कई वर्षों से अपनी समुद्री उपस्थिति और सैन्य क्षमताओं को तेज़ी से बढ़ा रहा है. नियमित लाइव-फायर ड्रिल्स उसके इसी रणनीति का हिस्सा हैं. इन अभ्यासों के जरिए चीन नौसैनिक प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाना चाहता है. साथ ही अपने समुद्री इलाकों में गतिविधियों पर करीबी नजर रखता है. संभावित खतरों का आकलन करता है और क्षेत्र में अपनी सैन्य पकड़ का संदेश देता है. यह कदम चीन के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है.

दक्षिण कोरिया और जापान की बढ़ी चिंता

येलो सी में इस सैन्य अभ्यास का सीधा असर पड़ोसी देशों, दक्षिण कोरिया और जापान पर पड़ रहा है. यह इलाका दक्षिण कोरिया की समुद्री सीमा के बेहद करीब है. इसलिए वहां चीन की सैन्य हलचल को दक्षिण कोरिया सैन्य दबाव के रूप में देखता है.

जापान भी इस ड्रिल को अपने समुद्री मार्गों और सुरक्षा हितों से जुड़ा मामला मान रहा है. दोनों देशों के चीन के साथ पहले से ही तनावपूर्ण संबंध हैं. ऐसे में यह अभ्यास नई तल्खी को जन्म दे सकता है.

क्षेत्रीय तनाव में और इजाफे की आशंका

चीन भले इसे “सामान्य प्रशिक्षण” बता रहा हो, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञ इसे साधारण अभ्यास से अधिक मानते हैं क्योंकि दक्षिण चीन सागर में पहले से क्षेत्रीय विवाद मौजूद है. पूर्वी चीन सागर में भी चीन-जापान के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा है. 

अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया की बढ़ती सैन्य साझेदारी

इन परिस्थितियों में चीन का लाइव-फायर अभ्यास एक भू-राजनीतिक संकेत माना जा रहा है, जो तनाव को और बढ़ा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभ्यास चीन की सैन्य तत्परता का प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि पड़ोसियों को उसकी बढ़ती शक्ति का एहसास कराने की कोशिश भी है.

यह भी पढ़ें- मौलवी केवल आदेश दोहराते हैं... 80 हजार मस्जिदों पर ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन ने उठाया सवाल