भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने हाल ही में एक थिंक टैंक कार्यक्रम में चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच संभावित गठजोड़ को भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है. उनका कहना था कि इन देशों के साझा हित भारत की सामरिक स्थिरता और सुरक्षा को अस्थिर कर सकते हैं. यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत पहले ही अपनी उत्तर और पश्चिमी सीमाओं पर सैन्य दबाव का सामना कर रहा है, और इस गठजोड़ से स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है.
चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच समान हित
जनरल चौहान ने इन तीन देशों के बीच रणनीतिक और सैन्य सहयोग की संभावना पर चिंता जताई, जो भारत के लिए एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बन सकती है. उनका कहना था कि पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते सैन्य और तकनीकी संबंध, साथ ही बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति, भारत के लिए खतरनाक हो सकते हैं. उन्होंने खासतौर से पाकिस्तान और चीन के बढ़ते सैन्य गठजोड़ पर ध्यान केंद्रित किया, और इसे भारत की सुरक्षा के लिए एक दीर्घकालिक खतरा बताया.
2025 में भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष
जनरल चौहान ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष "ऑपरेशन सिंदूर" का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शायद पहली बार था जब दो परमाणु हथियार संपन्न देशों के बीच सीधा सैन्य टकराव हुआ. उन्होंने इसे वैश्विक सैन्य इतिहास का एक अहम मोड़ बताया और कहा कि यह भविष्य के लिए एक चेतावनी हो सकती है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने सीमित और सटीक सैन्य कार्रवाई की थी, जिसका उद्देश्य आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर पाकिस्तान को उसकी परमाणु धमकियों से बाहर करने का था.
परमाणु धमकी से भारत की स्थिति
जनरल चौहान ने पाकिस्तान की परमाणु धमकियों को "ब्लैकमेल" करार दिया और कहा कि भारत अब ऐसी धमकियों से डरने वाला नहीं है. उनका कहना था कि भारत का 'नो फर्स्ट यूज' परमाणु सिद्धांत न केवल जिम्मेदार रणनीति का प्रतीक है, बल्कि इस सिद्धांत से पारंपरिक सैन्य कार्रवाई की गुंजाइश भी बनी रहती है. भारत का उद्देश्य हमेशा संघर्ष को सीमित और प्रभावी तरीके से हल करना है, और इस दृष्टिकोण में कोई बदलाव नहीं आया है.
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन का बढ़ता प्रभाव
जनरल चौहान ने हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते बाहरी प्रभावों पर भी चिंता व्यक्त की. उन्होंने बताया कि आर्थिक संकटों से जूझ रहे देशों में चीन अपना प्रभाव बढ़ा रहा है, और इससे भारत की सामरिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. श्रीलंका, म्यांमार और बांग्लादेश जैसे देशों में चीन के बढ़ते निवेश और सैन्य गतिविधियों ने इस चिंता को और गहरा किया है. जनरल चौहान ने यह भी कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन का प्रभाव भारतीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
पाकिस्तान और चीन के सैन्य संबंधों का विस्तार
जनरल चौहान ने यह भी बताया कि पाकिस्तान अब अपने 70-80 प्रतिशत हथियार चीन से खरीद रहा है, और चीन की रक्षा कंपनियां पाकिस्तान में वाणिज्यिक और रणनीतिक रूप से निवेश कर रही हैं. यह संबंध केवल सैन्य उपकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तकनीकी सहयोग, साइबर सहयोग और अन्य रक्षा संबंधित मामलों में भी साझेदारी हो रही है. इससे पाकिस्तान को चीन से सुरक्षा और सैन्य सहायता मिल रही है, जो भारत के लिए और भी बड़ी चुनौती बन सकती है.
बांग्लादेश और भारत के संबंध
जनरल चौहान की टिप्पणियां उस समय आई हैं जब बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं, और भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव की स्थिति बनी हुई है. जनरल चौहान ने कहा कि इस राजनीतिक संकट का फायदा उठाकर चीन और पाकिस्तान जैसे देश बांग्लादेश को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे भारत की पूर्वी सीमा और भी संवेदनशील बन सकती है. यह बांग्लादेश के राजनीतिक अस्थिरता को लेकर भारत के लिए एक नया खतरा पैदा कर सकता है.
भविष्य की सैन्य चुनौतियां
जनरल चौहान ने भविष्य में आने वाली सैन्य चुनौतियों के बारे में भी बात की, खासकर लंबी दूरी की मिसाइलों, ड्रोन और हाइपरसोनिक हथियारों के संदर्भ में. उन्होंने कहा कि फिलहाल कोई ऐसी अचूक प्रणाली नहीं है जो इन सभी खतरों को एक साथ निष्क्रिय कर सके. इसके अलावा, उन्होंने भारत को साइबर युद्ध, स्पेस युद्ध और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के लिए भी पूरी तरह से तैयार रहने की आवश्यकता पर जोर दिया. इन नए युद्ध क्षेत्रों में सफलता के लिए भारत को अपनी रणनीतियों में बदलाव लाना होगा और अपने रक्षा तंत्र को और भी उन्नत करना होगा.
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