चीन–पाकिस्तान की पनडुब्बी डील पर सतर्क भारत, नौसेना ने बताया—हर चुनौती का तैयार है जवाब

दक्षिण एशिया की समुद्री भू-राजनीति इन दिनों तेजी से बदल रही है. इलाके में चीन और पाकिस्तान की नजदीकी लगातार बढ़ रही है, और अब पनडुब्बियों की कथित गुप्त आपूर्ति ने सुरक्षा एजेंसियों को ज्यादा चौकन्ना कर दिया है.

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दक्षिण एशिया की समुद्री भू-राजनीति इन दिनों तेजी से बदल रही है. इलाके में चीन और पाकिस्तान की नजदीकी लगातार बढ़ रही है, और अब पनडुब्बियों की कथित गुप्त आपूर्ति ने सुरक्षा एजेंसियों को ज्यादा चौकन्ना कर दिया है. ऐसे माहौल में भारतीय नौसेना ने साफ संकेत दिया है कि भारत किसी भी समुद्री खतरे को हल्के में लेने वाला नहीं है और एंटी-सबमरीन वारफेयर की दिशा में उसकी तैयारियां पूरी मजबूती के साथ जारी हैं.

राजधानी दिल्ली में 20 नवंबर को आयोजित एक रक्षा कार्यक्रम में नौसेना के वाइस चीफ, वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन, ने मौजूदा हालात पर विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि चीन द्वारा पाकिस्तान को आधुनिक पनडुब्बियां देने की प्रक्रिया से नौसेना पूरी तरह अवगत है और हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा रही है. उनका जोर इस बात पर रहा कि भारतीय नौसेना को अच्छी तरह मालूम है कि एंटी-सबमरीन वारफेयर संचालन के लिए किस स्तर की क्षमताएं आवश्यक होती हैं. वाइस एडमिरल ने कहा कि चीन पाकिस्तान को पनडुब्बियां दे रहा है, यह हम जानते हैं. जैसे ही उनका इंडक्शन शुरू होगा, हम उसके मुताबिक अपनी रणनीति को और धार देंगे. हमारी निगरानी, हमारी तैयारी और हमारी टेक्नॉलजी सभी इस चुनौती के अनुरूप तैयार हैं.”

पाकिस्तान की ओर बढ़ रही चीनी पनडुब्बियाँ

चीन और पाकिस्तान के बीच कुल 8 पनडुब्बियों के निर्माण और सप्लाई को लेकर समझौता हो चुका है. इनमें से चार पनडुब्बियाँ चीन अपने शिपयार्ड में तैयार करके सीधे पाकिस्तान को भेजेगा, जबकि बाकी चार कराची शिपयार्ड में चीन की तकनीकी सहायता से बनाई जाएँगी. जानकारों का मानना है कि चीन में निर्मित बैच की पहली खेप बहुत जल्द पाकिस्तान को सौंप दी जा सकती है, जिससे अरब सागर के सामरिक समीकरण कुछ हद तक बदल सकते हैं.

INS माहे क्यों है भारत के लिए इतना अहम?

चीन–पाकिस्तान डील के बीच भारत अपने जंगी बेड़े को और ज्यादा मजबूत बना रहा है. इसी कड़ी में INS माहे को 24 नवंबर को नौसेना में शामिल किया जाना है. INS माहे एक एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है, जिसे कोचीन शिपयार्ड ने बनाया है. इसका मुख्य उद्देश्य है. भारत के बंदरगाहों, हार्बर और तटीय इलाकों के पास किसी भी दुश्मन पनडुब्बी को प्रवेश करने से रोकना. यह युद्धपोत आकार में कॉम्पैक्ट लेकिन क्षमता में बेहद शक्तिशाली माना जा रहा है. इसकी खासियत यह है कि यह उथले पानी में संचालन करने में सक्षम है, जहाँ पारंपरिक बड़े एंटी-सबमरीन जहाज प्रभावी भूमिका नहीं निभा पाते. INS माहे के शामिल होने से तटीय सुरक्षा और भारत की एंटी-सबमरीन क्षमता को एक नया आयाम मिलने वाला है.

इससे पहले INS आन्द्रोत और INS अर्णाला भी सेवा में शामिल

भारतीय नौसेना के लिए यह साल एंटी-सबमरीन क्षमता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा है.कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और कोचीन शिपयार्ड मिलकर कुल 16 ASW-SWC जहाजों का निर्माण कर रहे हैं. दोनों के जिम्मे 8-8 जहाज. GRSE द्वारा बनाए गए दो जहाज INS आन्द्रोत और INS अर्णाला पहले ही नौसेना में शामिल किए जा चुके हैं. इन जहाजों ने तटीय इलाकों में सबमरीन-रोधी गश्त और निगरानी को नई ताकत दी है. INS माहे के शामिल होने से इस श्रृंखला का विस्तार और भी प्रभावशाली हो जाएगा.

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