CJI BR Gavai Retirement: मैं सभी धर्मों को... रिटायरमेंट से पहले सभी धर्मों पर क्या बोले CJI गवई?

CJI BR Gavai Retirement:  देश के मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई जब अपने रिटायरमेंट की दहलीज पर खड़े थे, तब उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जिसने उनकी व्यक्तित्व की गहराई और मूल्यों को उजागर कर दिया. फेयरवेल समारोह में उन्होंने बड़ी विनम्रता से बताया कि उनका जीवन धर्मनिरपेक्षता, समानता और सहअस्तित्व की शिक्षा से गढ़ा गया है, और यह सीख उन्हें अपने पिता से मिली.

CJI BR Gavai Retirement last message on all religion
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CJI BR Gavai Retirement:  देश के मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई जब अपने रिटायरमेंट की दहलीज पर खड़े थे, तब उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जिसने उनकी व्यक्तित्व की गहराई और मूल्यों को उजागर कर दिया. फेयरवेल समारोह में उन्होंने बड़ी विनम्रता से बताया कि उनका जीवन धर्मनिरपेक्षता, समानता और सहअस्तित्व की शिक्षा से गढ़ा गया है, और यह सीख उन्हें अपने पिता से मिली.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन द्वारा आयोजित विदाई समारोह में सीजेआई गवई ने खुलकर साझा किया कि वे बौद्ध धर्म का पालन करते हैं, लेकिन हर धर्म का सम्मान कर उसका सार समझते हैं. उन्होंने कहा कि उनका विश्वास किसी एक धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि सभी धर्मों के प्रति उनकी श्रद्धा बराबर है.

“बचपन से सीखा सभी धर्मों का सम्मान करना”

अपने संबोधन में CJI गवई ने बताया, “मैं बौद्ध धर्म का अनुयायी हूं, लेकिन मैंने किसी भी धर्म का विस्तार से अध्ययन नहीं किया. इसके बावजूद मैं खुद को पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष मानता हूं. इस्लाम, हिंदू, सिख, बौद्ध हर धर्म में मेरा विश्वास है. यह मूल्य मैंने अपने पिता से पाया, जो स्वयं बेहद धर्मनिरपेक्ष विचारों के व्यक्ति थे और डॉ. भीमराव अंबेडकर के सच्चे अनुयायी थे.” उन्होंने याद किया कि किस तरह बचपन में उनके पिता राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान अलग-अलग धर्मस्थलों पर जाने का सुझाव पाते थे और वह हमेशा सभी धर्मों के प्रति सम्मान दिखाते थे. इसी माहौल ने उन्हें विविधता में एकता का महत्व सिखाया.

41 साल की सेवा यात्रा का सुखद समापन

फेयरवेल कार्यक्रम में जस्टिस गवई ने अपने 41 वर्षों के न्यायिक सफर को याद करते हुए कहा कि वे संतोष और कृतज्ञता की भावना के साथ यह पद 23 नवंबर को छोड़ रहे हैं.उन्होंने जस्टिस सूर्यकांत की भी सराहना की, जिन्हें अब देश का अगला मुख्य न्यायाधीश बनने की जिम्मेदारी मिल रही है.जस्टिस गवई ने बताया कि वह और जस्टिस सूर्यकांत दोनों साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं.गवई ने महाराष्ट्र के अमरावती के सेमी-स्लम इलाके में स्थित म्युनिसिपल स्कूल में पढ़ाई की. जबकि जस्टिस सूर्यकांत ने हरियाणा के हिसार जिले के सरकारी स्कूल में शिक्षा प्राप्त की.उन्होंने कहा कि जीवन की कठिन परिस्थितियों के बावजूद दोनों ने कड़ी मेहनत के बल पर आज यह मुकाम हासिल किया है.

CJI के तौर पर छोटा लेकिन प्रभावशाली कार्यकाल

जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश हैं. उन्होंने 14 मई को यह पद संभाला था और उनका कार्यकाल 6 महीने 6 दिनों का रहा. हालांकि अवधि छोटी रही, लेकिन इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की और सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने पर जोर दिया.वे कुल साढ़े छह साल तक सुप्रीम कोर्ट के जज रहे.

अब कमान संभालेंगे जस्टिस सूर्यकांत

जस्टिस सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर जज होने के नाते 24 नवंबर को CJI का पद ग्रहण करेंगे.उनकी उम्र वर्तमान में 62 वर्ष है और उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा. उम्र 65 होने से एक दिन पहले—10 फरवरी को—वे रिटायर होंगे. जस्टिस सूर्यकांत के नाम की आधिकारिक सिफारिश खुद CJI गवई ने केंद्र सरकार को भेजी थी, जिसे राष्ट्रपति ने मंज़ूरी दे दी.

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