नई दिल्ली/किश्तवाड़: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में गुरुवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई जब पड्डर सब-डिवीजन के चशोटी गांव में दोपहर लगभग 12:30 बजे बादल फटने से भारी तबाही मच गई. यह वही स्थान है जहां से प्रसिद्ध मचैल माता यात्रा की शुरुआत होती है. इस आपदा में अब तक 12 श्रद्धालुओं के शव बरामद किए जा चुके हैं जबकि 25 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं. मृतकों की संख्या में और बढ़ोतरी की आशंका है क्योंकि राहत और बचाव अभियान अब भी जारी है.
इस दौरान हजारों श्रद्धालु मचैल माता की वार्षिक तीर्थयात्रा के पहले पड़ाव चशोटी में मौजूद थे. हर साल अगस्त महीने में आयोजित होने वाली यह यात्रा 25 जुलाई से 5 सितंबर तक चलती है. इस बार भी भारी संख्या में श्रद्धालु यहां एकत्र हुए थे. जगह-जगह बसें, टेंट, लंगर और दुकानों की भरमार थी, परंतु बादल फटने के बाद आए जलप्रलय ने सबकुछ बहा दिया.
बाढ़ का पानी और पहाड़ों से आई मिट्टी तथा पत्थर श्रद्धालुओं के तंबुओं, खाने-पीने के स्टॉल और पार्किंग में खड़ी गाड़ियों को बहाकर ले गए. कई लोग मौके पर ही बह गए, कई गंभीर रूप से घायल हुए और कई लापता हैं. प्रशासन ने बताया कि हालात बेहद नाजुक और संवेदनशील बने हुए हैं.
प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रियाएं
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल कार्यालय ने घटना पर गहरा शोक जताया है और ट्वीट कर कहा, "किश्तवाड़ में बादल फटने की घटना से व्यथित हूं. शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं. सभी एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि बचाव और राहत कार्यों में कोई कसर न छोड़ी जाए."
किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज शर्मा ने पुष्टि की कि चशोटी गांव में अचानक बाढ़ आने से आपदा जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है और राहत-बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है.
जम्मू-कश्मीर सरकार में वरिष्ठ नेता सुनील शर्मा ने भी मौके पर पहुंचने की तैयारी की जानकारी देते हुए कहा, "स्थिति गंभीर है. यात्रा चल रही थी, इस कारण क्षेत्र अत्यधिक भीड़भाड़ वाला था. नुकसान का आकलन अभी नहीं हो पाया है लेकिन हालात चिंताजनक हैं. हमने केंद्र सरकार से एनडीआरएफ की टीमों की मांग की है."
मौसम विभाग की चेतावनी: और बारिश की आशंका
श्रीनगर स्थित मौसम केंद्र ने पहले ही चेतावनी जारी कर दी थी कि अगले 4–6 घंटों के भीतर जम्मू-कश्मीर के अधिकांश इलाकों में मध्यम से भारी बारिश के साथ तेज हवाएं, बिजली और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है. विशेष तौर पर कुपवाड़ा, बारामूला, बांदीपोरा, श्रीनगर, गांदरबल, पुंछ, राजौरी, रियासी, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ के पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बाढ़, भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं हो सकती हैं.
जनता को ढीली संरचनाओं, बिजली के खंभों और पुराने पेड़ों से दूर रहने की सलाह दी गई है. इसके अलावा डल झील, वुलर झील और अन्य जलाशयों में किसी भी प्रकार की नौकायन या पर्यटन गतिविधियों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है.
मचैल माता यात्रा: श्रद्धा और जोखिम का संगम
हालांकि यह यात्रा धार्मिक रूप से अत्यंत पवित्र मानी जाती है, लेकिन इसका मार्ग भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है. भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाएं आम हो गई हैं. यही कारण है कि हर साल यात्रा के दौरान कई बार ऐसे संकट उत्पन्न होते हैं.
बीते दिनों उत्तरकाशी में भी हुआ था कहर
बादल फटने की यह घटना पहली नहीं है. इससे पहले 5 अगस्त को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में भी एक भीषण आपदा आई थी. खीरगाड़ नदी में आई भयंकर बाढ़ ने गांव के कई होटल, मकान और होमस्टे को पूरी तरह जमींदोज कर दिया. 1300 से अधिक लोगों को वहां से रेस्क्यू किया गया, लेकिन 68 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं जिनमें नेपाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और सेना के जवान भी शामिल हैं.
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