यूपी के सभी 75 जिलों को मिलेंगे नए पर्यटन स्थल, दिवाली से पहले CM योगी की बड़ी सौगात

उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अभिनव कदम उठाया है. इसका उद्देश्य न केवल पशुधन संरक्षण को बढ़ावा देना है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देने की योजना है.

CM Yogi Adityanath Cow Shelter 75 District Cow Shelter
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उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अभिनव कदम उठाया है. इसका उद्देश्य न केवल पशुधन संरक्षण को बढ़ावा देना है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देने की योजना है.

प्रदेश के हर जिले में एक आदर्श गोशाला स्थापित की जाएगी, जिसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. इसके तहत ‘काऊ टूरिज्म’ की अवधारणा को बढ़ावा देने की योजना है, ताकि लोग न केवल गायों की देखभाल के बारे में जान सकें, बल्कि इससे जुड़े उत्पादों और गतिविधियों से भी जुड़ाव महसूस करें. इस पहल के ज़रिए स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों के लिए नौकरी और आय के नए रास्ते खुलेंगे.

गोबर से बने दीप और मूर्तियों को मिलेगा प्रोत्साहन

दीपावली के अवसर पर सरकार ने खास अभियान चलाने का फैसला किया है, जिसके तहत गाय के गोबर से बने दीपक, मूर्तियाँ और सजावटी सामान बाज़ार में उपलब्ध कराए जाएंगे. पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने जानकारी दी कि इन उत्पादों की पहुंच आम लोगों तक सुनिश्चित की जाएगी और ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा मिलेगा.

महिला समूहों को मिलेगा सहयोग

इस योजना में महिला स्वयं सहायता समूहों को भी जोड़ा जाएगा. गोबर, गोमूत्र, दूध और अन्य गौ-उत्पादों से जुड़ी वस्तुओं के निर्माण और विपणन के लिए इन्हें प्रशिक्षण और साधन मुहैया कराए जाएंगे. इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी और उनके लिए आय का सशक्त जरिया भी तैयार होगा.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार

प्रमुख सचिव पशुधन एवं दुग्ध विकास मुकेश मेश्राम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्थानीय स्तर पर गोशालाओं में गोबर और गोमूत्र के व्यावसायिक उपयोग की रणनीति तैयार की जाए. इससे न केवल गोशालाएं स्वावलंबी बनेंगी, बल्कि यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया आधार प्रदान करेगी. सरकार की यह योजना एक तरफ पारंपरिक मान्यताओं को आधुनिक उपयोगिता से जोड़ती है, तो दूसरी तरफ स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक सशक्त प्रयास है.

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