Uttar Pradesh Gram Pradhan: उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है. प्रदेश के ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 मई 2026 को समाप्त हो गया है, लेकिन इसके बावजूद गांवों में उनकी भूमिका बनी रहेगी. योगी आदित्यनाथ सरकार ने मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही पंचायतों का प्रशासक बनाने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलने के बाद पंचायती राज विभाग सोमवार शाम तक इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर सकता है.
पहली बार ग्राम प्रधानों को मिलेगी प्रशासक की जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश में यह पहला मौका होगा जब ग्राम पंचायतों में प्रशासक समिति का गठन किया जाएगा और मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. अब तक ऐसी स्थिति में एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त किया जाता था, लेकिन इस बार सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है.
राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी ग्राम प्रधानों को ही पंचायत संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी. इससे पंचायत चुनाव होने तक गांवों में विकास कार्यों की निगरानी और संचालन मौजूदा प्रधानों के हाथ में रहेगा.
2027 विधानसभा चुनाव के बाद होंगे पंचायत चुनाव
प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर लंबे समय से अटकलें चल रही थीं, लेकिन अब स्थिति लगभग साफ हो गई है. सरकार की तैयारी पंचायत चुनाव को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद कराने की है. इसी वजह से अंतरिम व्यवस्था के तौर पर प्रशासक नियुक्त करने का फैसला लिया गया है.
बताया जा रहा है कि प्रदेश की 57 हजार 695 ग्राम पंचायतों में 26 मई से नई व्यवस्था लागू हो जाएगी. सरकार नहीं चाहती कि पंचायतों के कामकाज पर असर पड़े, इसलिए मौजूदा प्रधानों को ही जिम्मेदारी सौंपने का रास्ता चुना गया है.
पंचायत चुनाव में देरी की ये हैं बड़ी वजहें
सूत्रों के अनुसार पंचायत चुनाव में देरी के पीछे कई प्रशासनिक और कानूनी कारण बताए जा रहे हैं. हाईकोर्ट में चल रही प्रक्रियाओं और चुनाव आयोग की रिपोर्ट के कारण चुनाव कार्यक्रम तय होने में समय लग रहा है.
इसके अलावा पंचायत मतदाता सूची का कार्य भी अभी पूरी तरह पूरा नहीं हो पाया है. जानकारी के मुताबिक अंतिम मतदाता सूची 10 जून को जारी की जाएगी. ऐसे में निकट भविष्य में पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं माना जा रहा.
ग्राम प्रधान संघ ने भी की थी मांग
राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संघ ने भी सरकार से मांग की थी कि पंचायत चुनाव तक मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासनिक अधिकार दिए जाएं. संगठन का कहना था कि इससे गांवों में विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे और योजनाओं का संचालन लगातार जारी रहेगा.
सरकार के इस फैसले को ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. अब पंचायत चुनाव होने तक गांवों के विकास, योजनाओं की निगरानी और स्थानीय प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी मौजूदा प्रधानों के पास ही रहेगी.
गांवों में जारी रहेंगे विकास कार्य
सरकार का मानना है कि यदि पंचायतों में प्रशासकीय व्यवस्था समय पर लागू नहीं की जाती, तो विकास योजनाओं और स्थानीय कार्यों पर असर पड़ सकता था. इसलिए ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाकर गांवों में चल रही परियोजनाओं को बिना रुकावट जारी रखने की तैयारी की गई है.
आने वाले महीनों में पंचायतों के कामकाज पर इसी व्यवस्था के तहत निगरानी रखी जाएगी, जबकि पंचायत चुनाव को लेकर अंतिम फैसला विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही होने की संभावना जताई जा रही है.
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