CM योगी ने गोरखपुर में हाइटेक फोरेंसिक लैब का किया उद्घाटन, कहा - नए उत्तर प्रदेश में अपराध मंजूर नहीं..

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गोरखपुर में 72.78 करोड़ रुपये की लागत से बनी अत्याधुनिक क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन किया. इस प्रयोगशाला के शुरू होने से अब राज्य में अपराधों की जांच एक नई दिशा में होगी.

CM Yogi inaugurated a hi-tech forensic lab in Gorakhpur
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गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गोरखपुर में 72.78 करोड़ रुपये की लागत से बनी अत्याधुनिक क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन किया. इस प्रयोगशाला के शुरू होने से अब राज्य में अपराधों की जांच एक नई दिशा में होगी. इस दौरान सीएम योगी ने कहा है कि फॉरेंसिक जांच से अब किसी भी आपराधिक घटना का पर्दाफाश मिनटों में हो जाएगा. गंभीर मामलों में यह जांच निर्णायक भूमिका निभाएगी.

हाइटेक लैब का दौरा और कार्यप्रणाली की जानकारी

गोरखपुर स्थित शास्त्री चौक पर उद्घाटन के बाद, सीएम योगी ने इस छह मंजिला प्रयोगशाला का निरीक्षण किया. उन्होंने लैब के विभिन्न यूनिट्स का मुआयना किया, जिनमें डिजिटल फोरेंसिक, साइबर फोरेंसिक, वॉइस एनालिसिस, बैलिस्टिक जांच, विस्फोटक विश्लेषण, दस्तावेज़ और रासायनिक जांच शामिल हैं. अधिकारियों ने उन्हें बताया कि यह लैब अब मोबाइल, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, सर्वर और सीसीटीवी के डाटा की उन्नत रिकवरी करने में सक्षम है, जो आतंकवाद, संगठित अपराध, साइबर अपराध और फर्जीवाड़े की जांच को तेज़ और प्रभावी बनाएगा.

पूर्वांचल और नेपाल से जुड़े मामलों में अहम भूमिका

इस नई ए-ग्रेड फॉरेंसिक लैब की उपयोगिता केवल गोरखपुर और आसपास के जिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नेपाल से जुड़ी अपराधी गतिविधियों की जांच में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. विशेष रूप से पूर्वांचल के जिलों जैसे देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर और बस्ती की जांच में यह लैब बेहद कारगर साबित होगी.

लैब में स्थापित बैलिस्टिक यूनिट अब आग्नेय अस्त्रों की जांच को पहले से कहीं अधिक तेज़ी से और सटीकता से करेगी. विस्फोटक और रासायनिक विश्लेषण यूनिटों के जरिए बम विस्फोट, आगजनी और रासायनिक अपराधों की गहन जांच होगी. साथ ही, वॉइस एनालिसिस यूनिट के माध्यम से फिरौती, धमकी और आतंकवाद से जुड़े मामलों में संदिग्ध कॉल्स की सटीक पुष्टि की जा सकेगी, जिससे अपराधियों की पहचान में तेजी आएगी.

राज्य सरकार की पहल और गृह विभाग का योगदान

यह अत्याधुनिक लैब गृह विभाग की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका निर्माण राजकीय निर्माण निगम द्वारा किया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना का उद्घाटन करते हुए इसे राज्य की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था में क्रांतिकारी कदम बताया. उनका कहना था कि इस लैब की मदद से गंभीर अपराधों की जांच में तेज़ी आएगी और अपराधियों को पकड़ने में आसानी होगी.

"नया उत्तर प्रदेश अपराध को कतई स्वीकार नहीं करता"

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 के बाद का नया उत्तर प्रदेश अपराध को कतई स्वीकार नहीं करता है. यदि किसी ने यहां अपराध करने की जुर्रत की तो उसे हर हाल में उसकी कीमत भी चुकानी होगी. वह दौर खत्म हो गया जब पीड़ित तड़पता, भटकता था और अपराधी मौज-मस्ती करते थे. अब प्रदेश सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत साक्ष्य संकलन और फॉरेंसिक साइंस लैब्स (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) के जरिए इसके प्रमाणन की ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित कर दी है कि कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा. उन्होंने कहा कि आज प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति, वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जांच और आधुनिक फॉरेंसिक साइंस लैब्स के जरिए ऐसी व्यवस्था विकसित हुई है कि अपराधी अब बच नहीं सकते. सटीक, त्वरित और पारदर्शी जांच के कारण पीड़ित को सहज, सुगम और समयबद्ध न्याय उपलब्ध हो रहा है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले साक्ष्य इकट्ठे होने पर भी अच्छी फॉरेंसिक साइंस लैब के अभाव में अपराधी बच जाते थे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गत वर्ष जुलाई से तीन नए कानून (भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य संहिता 2023) लागू होने के बाद फॉरेंसिक साइंस लैब्स की उपयोगिता और बढ़ गई है. नए कानून में सात वर्ष से अधिक कारावास वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य कर दिया है. इन कानूनों के लागू होने से काफी पहले ही यूपी सरकार ने लैब्स स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी थी.

फॉरेंसिक साइंस लैब्स से रोजगार का सृजन भी होगा

सीएम योगी ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस लैब्स से युवाओं के लिए नए रोजगार का सृजन भी होगा. इसके लिए सरकार ने लखनऊ में यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की स्थापना की है. यहां लैब टेक्नीशियन के लिए सर्टिफिकेट, लैब में साक्ष्य मिलान करने वालों के लिए डिप्लोमा और विशेषज्ञ के लिए डिग्री कोर्स शुरू किए गए हैं.