पाकिस्तान में पानी की कमी से सूख रही फसलें, सिंधु जल संधि रोकने से बढ़ी भुखमरी की आशंका, देखें आंकड़े

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय गहरे संकट के दौर से गुजर रही है, और अब देश का कृषि क्षेत्र भी बुरी तरह चरमराता नजर आ रहा है.

Crops are drying up due to lack of water in Pakistan
प्रतीकात्मक तस्वीर/Photo- FreePik

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय गहरे संकट के दौर से गुजर रही है, और अब देश का कृषि क्षेत्र भी बुरी तरह चरमराता नजर आ रहा है. ताजा इकोनॉमिक सर्वे के आंकड़े इस ओर इशारा कर रहे हैं कि पाकिस्तान की कृषि वृद्धि दर वित्त वर्ष 2024-25 में महज 0.56% पर सिमट गई है, जबकि पिछले वर्ष यह 6.4% थी. यानी कृषि विकास दर में 90% से अधिक की गिरावट दर्ज हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही हालात रहे तो देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार पर गंभीर असर पड़ सकता है.

पानी की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती

पाकिस्तान के कृषि संकट की सबसे बड़ी वजह है- जल संकट. पाकिस्तान का सिंचाई नेटवर्क मुख्य रूप से सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है, जो भारत से होकर आती है. भारत ने सिंधु जल समझौते के तहत अपने हिस्से के पानी का पूरा उपयोग करना शुरू कर दिया है, जिससे पाकिस्तान को मिलने वाले पानी में उल्लेखनीय कमी आई है. इसके अलावा पाकिस्तान में जलाशयों का सूखना, नहरों का जाम होना और भूजल स्तर का लगातार गिरना समस्या को और गंभीर बना रहे हैं.

सेना की भी बढ़ी चिंता

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सेना की भी बड़ी हिस्सेदारी कृषि क्षेत्र में है. सेना के नियंत्रण में कई फार्महाउस और कृषि प्रोजेक्ट्स हैं, जो पानी की कमी से अब प्रभावित हो रहे हैं. माना जा रहा है कि पाकिस्तान सेना आंतरिक स्थिति को संभालने और संभावित असंतोष को काबू में रखने के लिए वैकल्पिक रणनीतियों पर विचार कर रही है.

खाद्य संकट का खतरा बढ़ा

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान पहले से ही खाद्य असुरक्षा से जूझ रहा है. जल संकट के चलते गेहूं, चावल और कपास जैसी जरूरी फसलें प्रभावित हो रही हैं. यदि पानी की उपलब्धता और खेती में गिरावट का यह दौर जारी रहा, तो देश को अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करना पड़ेगा. लेकिन पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार पहले से ही संकट में है, जिससे आयात करना और मुश्किल हो जाएगा.

सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता का खतरा

कृषि में लगातार गिरावट का असर सिर्फ अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा. हाल के महीनों में पंजाब और सिंध प्रांत में किसानों ने पानी की किल्लत और गिरती फसल उत्पादन के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं. अगर यह असंतोष व्यापक स्तर पर फैलता है, तो देश में सामाजिक अस्थिरता और राजनीतिक तनाव और भी बढ़ सकता है.

भारत की जल कूटनीति का असर

भारत ने सिंधु जल समझौते के दायरे में रहते हुए अपने जल अधिकारों का पूरी तरह से उपयोग करना शुरू कर दिया है. यह कदम पाकिस्तान के जल संकट को और गहरा कर रहा है. हालांकि भारत का यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत वैध है, लेकिन इसका प्रभाव पाकिस्तान के कृषि और जल प्रबंधन पर व्यापक रूप से देखा जा रहा है.

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