'यह UN है, गुप्त चैट नहीं...' क्यूबा के विदेश मंत्री ने अमेरिकी राजदूत को रगड़ा, जानें क्या है मामला

संयुक्त राष्ट्र महासभा हमेशा से वैश्विक मुद्दों पर खुली बहस और संवाद का मंच माना जाता रहा है. हालांकि, हाल के वर्षों में कुछ बड़ी शक्तियों का दबदबा इस अंतरराष्ट्रीय संस्था में स्पष्ट रूप से देखा गया है.

Cuban Foreign Minister targets US Ambassador
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न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा हमेशा से वैश्विक मुद्दों पर खुली बहस और संवाद का मंच माना जाता रहा है. हालांकि, हाल के वर्षों में कुछ बड़ी शक्तियों का दबदबा इस अंतरराष्ट्रीय संस्था में स्पष्ट रूप से देखा गया है. इस क्रम में हाल ही में एक ऐसा ही विवाद सामने आया जब क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज और अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज के बीच बहस गर्म हो गई, और इसका असर सभागार में महसूस किया गया.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस सत्र का एजेंडा क्यूबा पर अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर बहस था. अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने मंच से कहा कि ये प्रतिबंध “क्यूबा सरकार की तानाशाही नीतियों के खिलाफ” हैं और इनका उद्देश्य वहां लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देना है. वॉल्ट्ज का कहना था कि अमेरिका क्यूबा की जनता के समर्थन में है, न कि सरकार के दमनकारी रवैये के साथ.

क्यूबा के विदेश मंत्री का तीखा जवाब

जैसे ही वॉल्ट्ज अपनी बात रख रहे थे, ब्रूनो रोड्रिगेज ने उन्हें रोकते हुए कहा कि “मिस्टर वॉल्ट्ज, यह संयुक्त राष्ट्र है, कोई निजी चैट नहीं”. रोड्रिगेज का तात्पर्य था कि अमेरिका मंच पर निजी संदेश या सोशल मीडिया चैट की तरह खुलकर और पारदर्शी रूप से बहस नहीं कर रहा, जबकि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का सार्वजनिक मंच है.

इस टिप्पणी के बाद सभागार में कुछ क्षणों के लिए सन्नाटा छा गया. कई प्रतिनिधि मुस्कुराने लगे, और अमेरिकी राजदूत वॉल्ट्ज भी असमंजस में नजर आए. रोड्रिगेज ने आगे कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों ने क्यूबा की अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है.

संयुक्त राष्ट्र में बहस का ऐतिहासिक संदर्भ

क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंधों का मुद्दा वर्षों से संयुक्त राष्ट्र में हर साल उठता रहा है. महासभा में अक्सर भारी बहुमत से अमेरिका के इस कदम के खिलाफ वोट पड़ते हैं. यह बहस दशकों पुराने वॉशिंगटन–हवाना तनाव और अविश्वास को दर्शाती है. क्यूबा का आरोप है कि अमेरिकी प्रतिबंध आर्थिक आतंकवाद के रूप में क्यूबा की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं.

अमेरिका की दलील रहती है कि प्रतिबंधों का उद्देश्य क्यूबा में लोकतंत्र और मानवाधिकारों को बढ़ावा देना है. लेकिन क्यूबा का मानना है कि ये प्रतिबंध नागरिकों के जीवन और रोजमर्रा की जरूरतों पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं.

अंतरराष्ट्रीय मंच पर शब्दों की जंग

यह घटना यह दिखाती है कि संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच पर भी बड़े देशों के दबदबे और विरोधाभासी रुख स्पष्ट रूप से देखने को मिलते हैं. ब्रूनो रोड्रिगेज का तीखा बयान न केवल अमेरिका के रुख को चुनौती देता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर पारदर्शी और खुले संवाद की आवश्यकता कितनी महत्वपूर्ण है.

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