भारत-अमेरिका के बीच हो गई 1 बिलियन डॉलर की डिफेंस डील, HAL खरीदेगा तेजस Mk-1A फाइटर जेट के इंजन

भारत की प्रमुख रक्षा निर्माण कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक (GE) कंपनी के साथ एक बड़ा समझौता किया है.

Defense deal signed between India and America
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

भारत की प्रमुख रक्षा निर्माण कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक (GE) कंपनी के साथ एक बड़ा समझौता किया है. इस डील की कीमत करीब 1 बिलियन डॉलर (लगभग 8,300 करोड़ रुपये) बताई जा रही है. इसके तहत GE कंपनी भारत को F404-GE-IN20 इंजन की सप्लाई करेगी, जो भारतीय वायुसेना के तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) Mk-1A में इस्तेमाल किए जाएंगे.

यह करार ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर 50% तक के टैरिफ लगा दिए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा हुआ है. इसके बावजूद भारत ने अपने रक्षा कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए यह अहम कदम उठाया है.

क्या है डील की मुख्य बातें?

HAL ने GE के साथ 97 LCA Mk-1A विमानों के इंजन और सपोर्ट पैकेज की सप्लाई के लिए यह करार किया है.

  • इंजनों की आपूर्ति 2027 से शुरू होगी.
  • सभी डिलीवरी 2032 तक पूरी कर दी जाएंगी.
  • कुल मिलाकर HAL को 212 इंजनों की आवश्यकता होगी, जिसमें से यह डील एक बड़ी हिस्सेदारी को कवर करेगी.

इससे पहले, भारत के रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2025 में HAL के साथ 62,370 करोड़ रुपये का अनुबंध किया था, जिसके तहत भारतीय वायुसेना के लिए 97 तेजस Mk-1A विमान खरीदे जाने थे.

तेजस फाइटर जेट: आत्मनिर्भरता की पहचान

तेजस LCA भारत में डिजाइन और विकसित किया गया सिंगल-इंजन, मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है. इसे मुख्य रूप से वायु रक्षा, टोही मिशन और ग्राउंड अटैक जैसे अभियानों के लिए तैयार किया गया है.

इसका डिज़ाइन भारत की स्वदेशी तकनीकी क्षमता को दर्शाता है और यह भारतीय वायुसेना की रीढ़ बनने की दिशा में अग्रसर है.

तेजस का निर्माण पूरी तरह भारत में होता है, जबकि इसका इंजन अमेरिकी GE कंपनी का होता है. HAL पहले भी GE के F404 इंजन का उपयोग LCA Mk-1 के पहले बैच में कर चुकी है, और इस नए करार से इंजन आपूर्ति की निरंतरता बनी रहेगी.

पहले के प्रोजेक्ट्स में हुई देरी

2021 में रक्षा मंत्रालय ने HAL के साथ 48,000 करोड़ रुपये की डील की थी, जिसमें 83 तेजस Mk-1A विमान खरीदने का अनुबंध शामिल था. लेकिन GE AeroSpace की ओर से इंजन आपूर्ति में देरी के कारण तेजस विमानों की डिलीवरी में रुकावट आई. इस कारण वायुसेना के बेड़े की संख्या अपेक्षा से कम रह गई है.

फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास 31 स्क्वाड्रन हैं, जबकि पूर्ण क्षमता के लिए 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है. इस नई डील के जरिए HAL को इंजन आपूर्ति में आने वाली बाधाओं से राहत मिलने की उम्मीद है.

भारत को क्या फायदा होगा?

  • इस समझौते से HAL को समय पर इंजन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
  • वायुसेना को तेजस विमानों की डिलीवरी में तेजी आएगी.
  • इससे भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता (Atmanirbhar Bharat) कार्यक्रम को बल मिलेगा.

GE के साथ लंबे समय तक चलने वाले सहयोग से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) की संभावनाएं भी मजबूत होंगी.

रूस के साथ भी बड़ा करार

हाल ही में HAL ने रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के साथ भी साझेदारी की है. दोनों कंपनियां मिलकर SSJ-100 (Sukhoi Superjet 100) नामक क्षेत्रीय यात्री विमान के उत्पादन पर काम करेंगी.

SSJ-100 एक ट्विन-इंजन, नैरो-बॉडी कम्यूटर जेट है, जिसे क्षेत्रीय और छोटी दूरी की उड़ानों के लिए डिजाइन किया गया है. अब तक दुनिया भर में 200 से अधिक विमान बनाए जा चुके हैं, जो 16 से ज्यादा एयरलाइंस द्वारा संचालित किए जा रहे हैं.

इस साझेदारी से भारत को अपनी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना “उड़ान” (UDAN) के तहत छोटे शहरों को जोड़ने में मदद मिलेगी. इसके तहत HAL को भारत में घरेलू बाजार के लिए SSJ-100 के निर्माण का विशेष अधिकार प्राप्त होगा.

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