दिल्ली की सिर्फ हवा ही नहीं, पानी भी प्रदूषित... CGWB की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, इससे क्या है खतरा?

राजधानी दिल्ली में जहां एक ओर वायु प्रदूषण लोगों की सेहत पर लगातार असर डाल रहा है, वहीं अब जमीन के नीचे का पानी भी गंभीर खतरे की ओर बढ़ता दिख रहा है.

Delhi air and water are polluted Revealed in CGWB report
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

Delhi Water Pollution: राजधानी दिल्ली में जहां एक ओर वायु प्रदूषण लोगों की सेहत पर लगातार असर डाल रहा है, वहीं अब जमीन के नीचे का पानी भी गंभीर खतरे की ओर बढ़ता दिख रहा है. सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड (CGWB) की ताजा रिपोर्ट ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है. यह रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में दाखिल की गई है, जिसमें दिल्ली के कई इलाकों के भूजल में खतरनाक रासायनिक तत्व तय मानकों से कहीं अधिक पाए गए हैं.

CGWB की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में भूजल में फ्लोराइड, क्लोराइड, नाइट्रेट और आयरन की मात्रा सुरक्षित सीमा से ज्यादा पाई गई है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, लंबे समय तक इस तरह का पानी पीने से दांतों, हड्डियों, किडनी और पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.

2023 मॉनसून सैंपलिंग में बड़ा खुलासा

रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2023 के मॉनसून सीजन के दौरान दिल्ली से कुल 103 भूजल सैंपल लिए गए. इनमें से करीब 16.50 प्रतिशत सैंपलों में फ्लोराइड की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई.

इन सैंपलों में फ्लोराइड का स्तर 0.28 से लेकर 3.70 मिलीग्राम प्रति लीटर तक दर्ज किया गया, जबकि मानक सीमा इससे काफी कम मानी जाती है.

फ्लोराइड प्रदूषण में दिल्ली चौथे स्थान पर

फ्लोराइड प्रदूषण के मामले में देश में सबसे खराब स्थिति राजस्थान, हरियाणा और कर्नाटक की बताई गई है. इन राज्यों के बाद दिल्ली चौथे स्थान पर है.

रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में 43.17 प्रतिशत सैंपलों में फ्लोराइड अधिक पाया गया, जबकि दिल्ली में भी स्थिति तेजी से बिगड़ती जा रही है.

दिल्ली के ये इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित

CGWB की रिपोर्ट में दिल्ली के कई क्षेत्रों को फ्लोराइड प्रदूषण के लिहाज से संवेदनशील बताया गया है. इनमें शामिल हैं:

  • नई दिल्ली
  • नॉर्थ दिल्ली
  • नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली
  • साउथ दिल्ली
  • शाहदरा
  • साउथ-वेस्ट दिल्ली

इन इलाकों में भूजल का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति खास तौर पर चिंता का विषय है.

बारिश से पहले और बाद भी हालात गंभीर

बारिश के प्रभाव को समझने के लिए मॉनसून से पहले और बाद में दिल्ली की 24 जगहों से अलग-अलग सैंपल लिए गए.

रिपोर्ट के मुताबिक,

  • मॉनसून से पहले 37.66 प्रतिशत सैंपलों में फ्लोराइड अधिक पाया गया
  • मॉनसून के बाद भी यह आंकड़ा लगभग 37.50 प्रतिशत रहा

इससे साफ है कि बारिश भी भूजल की गुणवत्ता में कोई खास सुधार नहीं ला सकी.

नाइट्रेट का स्तर भी बढ़ा, स्वास्थ्य पर खतरा

रिपोर्ट में नाइट्रेट को लेकर भी गंभीर चेतावनी दी गई है. मई 2023 में दिल्ली से लिए गए सैंपलों में 20.39 प्रतिशत में नाइट्रेट का स्तर तय सीमा से ज्यादा पाया गया.

विशेषज्ञों के अनुसार, नाइट्रेट की सुरक्षित सीमा 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए, लेकिन दिल्ली के कुछ इलाकों में यह स्तर 294 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया.

मॉनसून के बाद और बढ़ा नाइट्रेट

दिल्ली में नाइट्रेट के बढ़ते स्तर को लेकर मॉनसून से पहले और बाद की तुलना भी की गई.

  • मॉनसून से पहले 16.67 प्रतिशत सैंपलों में नाइट्रेट अधिक था
  • मॉनसून के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 25 प्रतिशत तक पहुंच गया

यह संकेत देता है कि बारिश के दौरान जमीन में घुलने वाले रसायन और अपशिष्ट भूजल को और ज्यादा प्रदूषित कर रहे हैं.

लंबे समय तक फ्लोराइड और नाइट्रेट युक्त पानी का सेवन करने से बच्चों में दांतों की फ्लोरोसिस, हड्डियों की कमजोरी, पेट से जुड़ी समस्याएं और अन्य गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह खतरा और भी अधिक माना जाता है.

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