देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर दहशत के साये में आ गई जब लाल किले के पास हुए धमाके की जांच ने एक चौंकाने वाला सच उजागर किया—इस घटना के पीछे कोई आम अपराधी नहीं बल्कि डॉक्टरों का एक संगठित गैंग था. 10 नवंबर को हुए इस विस्फोट के मास्टरमाइंड के तौर पर डॉ. उमर का नाम सामने आया है.
जांच में खुलासा हुआ कि उनके साथ डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन, डॉ. आदिल और डॉ. मोहिउद्दीन जैसे शिक्षित लोग भी शामिल थे. ये सभी एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे और देश में अस्थिरता फैलाने की योजना बना रहे थे. हालांकि, एजेंसियों ने समय रहते इस साजिश को नाकाम कर दिया. जांच एजेंसियों को इन डॉक्टरों के ठिकानों से भारी मात्रा में विस्फोटक, हथियार और संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए हैं. इनकी शिक्षा, पेशे और आतंक में शामिल होने की खबर से पूरा देश सन्न रह गया. सवाल ये उठने लगा कि जो लोग इलाज के जरिए ज़िंदगियां बचाने की शपथ लेते हैं, वे मौत का कारोबार कैसे करने लगे?
जब डिग्रियों के बावजूद चुना हिंसा का रास्ता
यह पहली बार नहीं है जब ऊंची डिग्री वाले लोगों ने आतंक का रास्ता अपनाया हो. ऐसे कई उदाहरण हैं जब पढ़े-लिखे और बुद्धिजीवी दिखने वाले लोगों ने आतंक का चेहरा बनकर दुनिया को हिलाया है.
हाफिज सईद: आतंक की ‘फैक्ट्री’ चलाने वाला प्रोफेसर
पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा के चीफ हाफिज सईद ने पंजाब यूनिवर्सिटी से दो मास्टर डिग्रियां हासिल कीं और सऊदी अरब की किंग सऊद यूनिवर्सिटी से इस्लामिक स्टडीज और अरबी भाषा में स्पेशलाइजेशन किया. यही नहीं, वह यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी रहा. पढ़ाई के बाद उसने आतंक की एक पूरी फैक्ट्री खड़ी की और 26/11 मुंबई हमले जैसा जघन्य अपराध करवाया.
याकूब मेमन: अकाउंटेंट जिसने चुना मौत का रास्ता
1993 मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट था. शिक्षित, सफल और संपन्न परिवार से आने वाला याकूब आतंक की राह पर चल पड़ा और अंततः 30 जुलाई 2015 को फांसी पर झूल गया.
मंसूर पीरभॉय: टेक्नोलॉजी से आतंक तक
इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी मंसूर पीरभॉय एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, जो Yahoo जैसी बड़ी कंपनी में काम करता था. लेकिन उसकी तकनीकी समझ का इस्तेमाल समाज के भले के बजाय आतंक फैलाने के लिए किया गया.
ओसामा बिन लादेन: इंजीनियरिंग दिमाग, खूनी सोच
ओसामा बिन लादेन, जिसे अमेरिका ने 2011 में मार गिराया, ने किंग अब्दुल-अज़ीज़ यूनिवर्सिटी से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में डिग्री ली थी. पढ़ाई में उत्कृष्ट ओसामा ने 1988 में अल-कायदा की स्थापना की और इसे वैश्विक जिहाद का प्रतीक बना दिया.
अयमान अल-जवाहिरी: डॉक्टर से बना आतंकी सरगना
ओसामा का साथी और अल-कायदा का पूर्व प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी मिस्र का एक सर्जन था. मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद उसने मानवता की सेवा नहीं, बल्कि तबाही का रास्ता चुना. उसे 9/11 हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है.
अबु बकर अल-बगदादी: PhD वाले खौफ का दूसरा नाम
ISIS का नेता अबु बकर अल-बगदादी ने इस्लामिक स्टडीज में PhD हासिल की थी. उसने धर्म के नाम पर हजारों लोगों की जान ली और पूरी दुनिया में भय का माहौल पैदा किया. 2019 में अमेरिका ने उसे ढेर कर दिया.
जाकिर मूसा: इंजीनियरिंग छोड़ आतंक की राह
भारत के जाकिर मूसा, जिसने हिजबुल मुजाहिद्दीन के लिए हथियार उठाए, दरअसल B.Tech की पढ़ाई कर रहा था. लेकिन उसने डिग्री अधूरी छोड़ आतंक का रास्ता चुना. 2019 में सुरक्षाबलों ने उसे मार गिराया.
9/11 के हमलावर: पढ़े-लिखे लेकिन अंधे विचारों के गुलाम
9/11 हमले के हाईजैकर्स भी उच्च शिक्षा प्राप्त थे. मुख्य साजिशकर्ता मोहम्मद अत्ता ने काहिरा विश्वविद्यालय से वास्तुकला की पढ़ाई की और जर्मनी से शहरी डिज़ाइन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया. मारवान अल-शेही और ज़ियाद जर्राह जैसे बाकी आतंकी भी यूरोप के विश्वविद्यालयों में पढ़े थे.
शिक्षा नहीं, सोच मायने रखती है
यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि केवल शिक्षा ही इंसान को समझदार नहीं बनाती. जब विचारधारा जहरीली हो जाए और विवेक मर जाए, तो ज्ञान भी विनाश का हथियार बन जाता है. दिल्ली धमाके में पकड़े गए डॉक्टर इस सच्चाई की एक और कड़वी मिसाल हैं.
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