नई दिल्ली: नई दिल्ली का ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (AIIMS) केवल देश का सुप्रीम मेडिकल संस्थान ही नहीं, बल्कि लाखों मरीजों का इलाज कर उसका भरोसा जीतने वाला संगठन भी है. इस साल एम्स ने ओपीडी और आईपीडी में इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या ऐसी थी, जितनी सिंगापुर और फिलिस्तीन जैसे देशों की कुल आबादी है. यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है और स्वास्थ्य सेवा में एम्स की विशेषज्ञता को दर्शाता है.
मरीजों और सर्जरी का आंकड़ा
एम्स के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने 79वें स्वतंत्रता दिवस पर संस्थान के एक साल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया. आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में करीब 50 लाख मरीजों ने ओपीडी में इलाज कराया, जबकि 3.5 लाख से अधिक मरीज अस्पताल में भर्ती हुए. विभिन्न विभागों में करीब 3 लाख सर्जरी सफलतापूर्वक की गई. यह न केवल मरीजों की संख्या बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले इलाज की गारंटी भी दर्शाता है.
उन्नत तकनीक और नई सुविधाएं
अस्पताल ने इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक की क्षमता को बढ़ाते हुए 15,000 से अधिक एमआरआई किए. एम्स भारत का पहला संस्थान है, जहां एचआईवी ड्रग रेजिस्टेंस टेस्टिंग लैब स्थापित की गई. इसके अलावा 20 राज्यों में 25 ड्रग ट्रीटमेंट क्लीनिक्स और 73 एडिक्शन ट्रीटमेंट सुविधाएं विकसित की गईं, तथा 1,379 प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षण दिया गया.
रिसर्च और मेडिकल इनोवेशन
एम्स के आरपी सेंटर में रेटिनोमिक्स सुविधा शुरू की गई और बायोइंजीनियर्ड कॉर्नियल इम्प्लांट किए गए. विभिन्न विभागों से 4,000 से अधिक रिसर्च पेपर प्रकाशित किए गए. एम्स ने देश के 28 एम्स और केंद्रीय संस्थानों में 4,600 पदों के लिए कॉमन रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन 2024 भी आयोजित किया.
ग्रीन अस्पताल और भविष्य की तैयारी
डॉ. श्रीनिवास ने बताया कि एम्स यूनिवर्सल, इंटीग्रेटेड और तकनीकी आधारित हेल्थकेयर प्रदान करने के लिए लगातार काम कर रहा है. अस्पताल ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, सोलर एनर्जी, वॉटर रीसाइक्लिंग और एआई आधारित डायग्नोस्टिक पर भी काम कर रहा है. उन्होंने डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिक्स, रिसर्चर्स, स्टाफ और मरीजों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने एम्स को स्वास्थ्य सेवा में अग्रणी बनाया.
ये भी पढ़ें: स्वतंत्रता दिवस पर CM रेखा गुप्ता का तोहफा, अटल कैंटीन, किफायती आवास, 500 पालना गृह का किया ऐलान