पाकिस्तान में तबाही मचाने के बाद बढ़ी राफेल फाइटर जेट की डिमांड, फ्रांस को मिले 533 विमानों के ऑर्डर

चीन और पाकिस्तान की लगातार आलोचना और प्रोपेगेंडा के बावजूद फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमान की लोकप्रियता दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है.

Demand for Rafale increased after the devastation in Pakistan
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

पेरिस/नई दिल्ली: चीन और पाकिस्तान की लगातार आलोचना और प्रोपेगेंडा के बावजूद फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमान की लोकप्रियता दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है. डसॉल्ट एविएशन को इस समय कई देशों से बड़े पैमाने पर नए ऑर्डर मिल रहे हैं. हाल ही में फ्रांस और यूक्रेन के बीच हुए महत्वपूर्ण रक्षा समझौते ने राफेल की मांग को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है. 17 नवंबर को हुए इस करार के तहत फ्रांस अगले दशक में यूक्रेन को 100 राफेल फाइटर जेट सौंपेगा.

डसॉल्ट एविएशन ने अक्टूबर में अपना 300वां राफेल तैयार कर लिया था, और वर्ष के अंत तक कंपनी के पास राफेल के कुल ऑर्डर 533 तक पहुँच जाएंगे. इन ऑर्डर्स में भारत, मिस्र, कतर, ग्रीस, क्रोएशिया, यूएई, सर्बिया और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं.

भारत के 114 राफेल का मामला अभी लंबित

हालांकि भारतीय वायुसेना की बड़ी खरीद- 114 राफेल जेट पर केंद्रीय रक्षा मंत्रालय ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है. IAF पहले ही सरकार को आधिकारिक प्रस्ताव भेज चुका है और उम्मीद की जा रही है कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा सौदा हो सकता है.

इन 533 ऑर्डरों में वे 233 जेट शामिल हैं, जिनकी डिलीवरी अभी बाकी है. यूक्रेन के 100 विमान और भारत के संभावित 114 राफेल इसमें शामिल नहीं हैं. अगर दोनों सौदे पूरे हो जाते हैं तो वैश्विक स्तर पर राफेल की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी.

क्या भारत बनेगा राफेल प्रोडक्शन का हब?

भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने अपने विश्लेषण में बताया है कि भारत, राफेल निर्माण का वैश्विक हब बन सकता है. जून 2025 में डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) के बीच एक बड़ा समझौता हुआ, जिसमें फैसला हुआ कि राफेल लड़ाकू विमान का पूरा फ्यूजलाज (एयरफ्रेम) भारत में तैयार किया जाएगा.

यह पहली बार होगा जब राफेल का एयरफ्रेम फ्रांस के बाहर बनाया जाएगा. हैदराबाद में विकसित किए जा रहे इस संयंत्र में 2028 से हर महीने दो फ्यूजलाज बनने शुरू हो जाएंगे. इनका इस्तेमाल न केवल भारतीय वायुसेना के लिए, बल्कि दुनिया भर के राफेल ऑपरेटर देशों के लिए भी किया जाएगा.

डसॉल्ट पहले ही टाटा के साथ मिलकर हर साल 25 फ्यूजलाज तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है.

इसके साथ—

  • भारत में MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) सुविधा
  • M-88 इंजन की सर्विसिंग क्षमता

भी विकसित की जा चुकी है, जिससे भारत एशिया में राफेल सपोर्ट सेंटर बन सकता है.

120 kN वाला स्वदेशी इंजन बनेगा

भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है. सफ्रान और DRDO एक संयुक्त इंजन कार्यक्रम शुरू करने जा रहे हैं, जिसके तहत 120 kN थ्रस्ट वाला नया जेट इंजन विकसित किया जाएगा.

इस इंजन का इस्तेमाल भारत के स्वदेशी पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA में किया जाएगा. सफ्रान ने इंजन तकनीक का 100% ट्रांसफर, जिसमें अत्याधुनिक “क्रिस्टल ब्लेड तकनीक” भी शामिल है, देने पर सहमति जताई है.

शुरुआती चरण में 12 वर्षों के दौरान 9 प्रोटोटाइप विकसित किए जाएंगे और बाद में इंजन की क्षमता बढ़ाकर 140 kN तक ले जाई जाएगी.

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