गाज़ा पट्टी, जो दशकों से इज़राइल और फिलिस्तीनी संगठनों के बीच संघर्ष का केंद्र रही है, अब एक नए प्रकार की हिंसा का गवाह बन रही है. इस बार न तो इज़राइल की बमबारी, और न ही विदेशी हमले बल्कि खुद फिलिस्तीनी गुटों के बीच हुई एक भीषण झड़प ने कम से कम 27 लोगों की जान ले ली है.
इस संघर्ष ने गाज़ा के उन नागरिकों को फिर से दहशत में डाल दिया है, जो पहले ही महीनों से जारी जंग के चलते घर-बार, सुरक्षा और सामान्य जीवन खो चुके हैं.
कौन-कौन मारे गए?
इस झड़प में अब तक जिनकी मौत की पुष्टि हुई है, उनमें 19 लोग दुघमुश कबीले से और 8 हमास के लड़ाके शामिल हैं. यह संघर्ष गाज़ा सिटी के तेल अल-हवा इलाके में उस समय शुरू हुआ जब हमास के सैकड़ों लड़ाके एक इमारत में घुस गए, जहां कथित तौर पर दुघमुश कबीले के लोग छिपे हुए थे.
रात भर चली इस गोलीबारी में इलाके में जॉर्डनियन अस्पताल के पास भारी हिंसा देखी गई. स्थानीय लोगों ने बताया कि सशस्त्र हमास लड़ाकों ने मास्क पहनकर इलाके को घेर लिया और सीधे फायरिंग शुरू कर दी.
क्या है संघर्ष की जड़?
सूत्रों के अनुसार, इस हिंसा की शुरुआत एक हत्या से हुई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुघमुश कबीले से जुड़े कुछ लोगों ने हमास के दो महत्वपूर्ण लड़ाकों को गोली मार दी थी. उनमें से एक, हमास के वरिष्ठ सैन्य खुफिया प्रमुख इमाद आकेल का बेटा बताया गया है.
इस हमले के बाद हमास ने पूरे इलाके में 'सुरक्षा अभियान' चलाने का ऐलान किया और सैकड़ों लड़ाके भेजकर उस इमारत को घेर लिया, जहां कथित रूप से दोषी छिपे थे. इसके बाद दोनों पक्षों में खुलकर फायरिंग हुई.
हमास ने इस ऑपरेशन को “अवैध सशस्त्र समूहों के खिलाफ कार्रवाई” बताया, वहीं दुघमुश कबीले का दावा है कि हमास ने उनकी शरणस्थली एक पुरानी अस्पताल बिल्डिंग पर कब्जा करने की कोशिश की, जिससे हिंसा भड़की.
दुघमुश कबीला कौन है?
दुघमुश परिवार गाज़ा में लंबे समय से प्रभावशाली रहा है और उसे एक शक्तिशाली स्थानीय कबीले के रूप में जाना जाता है. उनका इतिहास हमास के साथ हमेशा तनावपूर्ण रहा है.
पूर्व में भी दोनों गुटों के बीच झड़पें हो चुकी हैं, लेकिन इस बार हिंसा का पैमाना अभूतपूर्व था. स्थानीय विश्लेषकों का कहना है कि यह झड़प केवल एक व्यक्तिगत हत्या का बदला नहीं थी, बल्कि गाज़ा में राजनीतिक और सैन्य नियंत्रण को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान का परिणाम है.
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