Sri Lanka cyclone Ditwah: श्रीलंका में तूफान दितवाह ने भारी तबाही मचाई है. डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर (DMC) की रिपोर्ट के अनुसार अब तक 153 लोगों की मौत हो चुकी है और 191 लोग लापता हैं. भारी बारिश, बाढ़ और लगातार लैंडस्लाइड ने देश के कई हिस्सों में तबाही मचा दी है. स्थानीय मीडिया के अनुसार, 25 जिलों में 217,263 परिवारों को प्रभावित देखा गया है, जिससे लगभग 7.7 लाख लोग संकट की चपेट में आए हैं.
तूफान के चलते कई इलाके अब भी बाढ़ और लैंडस्लाइड की चपेट में हैं. डीएमसी के आंकड़ों के मुताबिक, 27,494 परिवारों के 1 लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए हैं. देशभर में 798 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां खाने-पीने, मेडिकल सपोर्ट और प्राथमिक सहायता प्रदान की जा रही है. मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए सरकार ने आम लोगों को निचले इलाकों में लौटने से मना किया है.
.@NDRFHQ personnel, in close coordination with local authorities, continue to undertake relief operations in Sri Lanka.#OperationSagarBandhu
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) November 30, 2025
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भारत की मदद और रेस्क्यू ऑपरेशन
श्रीलंका में आई इस आपदा से निपटने के लिए भारत ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया है. भारतीय रेस्क्यू टीम स्थानीय अधिकारियों, एयरफोर्स, नेवी, आर्मी और पुलिस के साथ मिलकर प्रभावित लोगों की राहत में लगी हुई है.
विशेष रूप से दो भारतीय नेवी हेलीकॉप्टरों ने पन्नाला में बाढ़ में फंसे आठ लोगों को सुरक्षित निकालने में सफलता पाई. अधिकारियों के अनुसार चार भारतीय हेलीकॉप्टर पूरे देश में बचाव मिशन में सक्रिय हैं, जिनमें से दो एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत से ऑपरेशन कर रहे हैं. हेलीकॉप्टरों ने कई उड़ानें भरीं और फंसे लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया.
आपदा में राहत और सरकार की तैयारी
श्रीलंका सरकार ने राहत और बचाव कार्यों को और तेज कर दिया है. दूरसंचार कंपनियों के सहयोग से इमरजेंसी कॉल्स को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि मदद तेजी से प्रभावित लोगों तक पहुंच सके. राष्ट्रपति कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नेटवर्क कंजेशन कम किया जा रहा है ताकि रेस्क्यू टीमों को किसी भी बाधा के बिना राहत कार्य जारी रखने का अवसर मिले.
श्रीलंका में तूफान दितवाह ने न केवल जान-माल की हानि की है, बल्कि देश में बुनियादी ढांचे और जीवनयापन को भी गंभीर झटका दिया है. भारत की तत्परता और स्थानीय प्रशासन के समन्वय ने इस आपदा में राहत कार्यों को गति दी है, लेकिन परिस्थितियाँ अभी भी नाजुक बनी हुई हैं.
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