नई दिल्ली: अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्ताकी हाल ही में भारत पहुंचे, जिससे दोनों देशों के बीच संपर्क का एक नया अध्याय शुरू हुआ है. अगस्त 2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता पर फिर से नियंत्रण किया, उसके बाद यह पहला मौका है जब तालिबान शासन का कोई वरिष्ठ मंत्री भारत की आधिकारिक यात्रा पर आया है. लेकिन इस यात्रा से पहले एक अहम प्रक्रिया से गुजरना पड़ा- UNSC यानी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति लेनी पड़ी. सवाल उठता है कि एक देश का मंत्री भारत जैसे देश की यात्रा के लिए अंतरराष्ट्रीय मंजूरी क्यों ले रहा है?
अमीर खान मुत्ताकी का नाम UNSC Resolution 1988 (2011) के तहत प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में शामिल है. यह प्रस्ताव तालिबान के उन नेताओं पर लागू होता है जिन पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए गए हैं. इन प्रतिबंधों में यात्रा पर रोक, संपत्ति की जब्ती और हथियारों की खरीद-फरोख्त पर रोक जैसी शर्तें शामिल हैं.
Opening remarks at my meeting with Afghan FM Muttaqi, in New Delhi.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) October 10, 2025
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इसका अर्थ है कि मुत्ताकी जैसे नेता बिना संयुक्त राष्ट्र की विशेष छूट के किसी अन्य देश की यात्रा नहीं कर सकते. चूंकि भारत की यात्रा एक राजनयिक और राजनीतिक महत्व की थी, इसलिए तालिबान सरकार ने मुत्ताकी के लिए UNSC से अस्थायी यात्रा छूट (temporary travel exemption) मांगी, जो 30 सितंबर को स्वीकृत की गई. इसके तहत उन्हें 9 से 16 अक्टूबर तक भारत आने की अनुमति दी गई.
पहले क्यों नहीं मिली थी मंजूरी?
जानकारी के अनुसार, यह यात्रा पहले सितंबर 2025 में ही तय की जा रही थी, लेकिन तब संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति (1988 Taliban Sanctions Committee) ने इस पर सहमति नहीं दी थी. तालिबान के खिलाफ प्रतिबंधों को लेकर वैश्विक समुदाय का रुख अभी भी काफी सख्त है. कई देशों ने तालिबान शासन को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है, इसी कारण इन प्रतिबंधों में ढील देना भी एक जटिल प्रक्रिया है.
क्या अफगानिस्तान एक देश नहीं है?
यह सवाल अक्सर उठता है कि अगर अफगानिस्तान एक संप्रभु राष्ट्र है, तो उसके मंत्री को किसी और संस्था से अनुमति लेने की जरूरत क्यों पड़ती है. इसका जवाब यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अभी तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है. संयुक्त राष्ट्र समेत अधिकतर देशों का मानना है कि अफगानिस्तान में सत्ता का हस्तांतरण लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत नहीं हुआ, और वर्तमान शासन की मानवाधिकारों, महिलाओं की स्थिति और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर कई आपत्तियाँ हैं.
इसलिए, अफगानिस्तान को एक भू-राजनीतिक इकाई के रूप में तो मान्यता प्राप्त है, लेकिन तालिबान की सरकार को एक वैध सरकार के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है. इसी वजह से तालिबान नेताओं पर लगे UNSC प्रतिबंध अब भी प्रभावी हैं.
भारत और तालिबान के बीच महत्वपूर्ण बैठक
मौलवी अमीर खान मुत्ताकी की भारत यात्रा को राजनयिक दृष्टिकोण से एक बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है. पिछले कुछ वर्षों से भारत ने तालिबान से सीधे संपर्क से परहेज किया था, लेकिन अफगानिस्तान की भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति को देखते हुए भारत को अब वहां के सत्ताधारी दल से संवाद बनाए रखना जरूरी लग रहा है.
इस दौरे के जरिए भारत और तालिबान शासन के बीच सीधे संपर्क की शुरुआत हुई है. माना जा रहा है कि इस बैठक में मानवीय सहायता, सुरक्षा स्थिति, क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी संबंधों को लेकर बातचीत हुई.
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