मध्य पूर्व में लंबे समय से चल रहे इजरायल-गाजा संघर्ष को लेकर एक नई उम्मीद की किरण नजर आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर शांति वार्ता की दिशा में पहला ठोस कदम उठाया गया है. हमास ने ट्रंप द्वारा पेश की गई गाजा शांति योजना को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार करते हुए उस पर आगे की बातचीत के लिए सहमति दी है.
शनिवार, 4 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर एक अहम संदेश जारी किया. उन्होंने लिखा, "मैं इजरायल द्वारा अस्थायी रूप से बमबारी रोकने के फैसले की सराहना करता हूं ताकि शांति वार्ता और बंधकों की रिहाई का मार्ग प्रशस्त हो सके. हमास को अब जल्द से जल्द इस दिशा में आगे बढ़ना होगा. किसी तरह की देरी या बहानेबाजी अब स्वीकार नहीं की जाएगी. यदि गाजा से दोबारा कोई खतरा पैदा हुआ, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे." ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह केवल निष्पक्ष और निर्णायक समाधान चाहते हैं, जिसमें सभी पक्षों को न्याय मिले.
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की काहिरा यात्रा
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और राजनयिक स्टीव विटकॉफ मिस्र की राजधानी काहिरा रवाना हो चुके हैं. उनका मकसद हमास की ओर से बंधकों की रिहाई से संबंधित आखिरी विवरणों को अंतिम रूप देना है. यह यात्रा गाजा में जमीनी स्तर पर अमल शुरू कराने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
हमास ने दिखाई नरमी, सभी बंधकों की रिहाई को तैयार
हमास की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि संगठन ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना पर विस्तार से चर्चा के लिए तैयार है और वह इजरायल के सभी बंधकों को रिहा करने को भी राज़ी है. इस प्रतिक्रिया को वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. भारत, ब्रिटेन, फ्रांस और सऊदी अरब समेत कई बड़े देशों ने इस पहल का समर्थन किया है.
इजरायल ने रोकी बमबारी, राहत की सांस
गौरतलब है कि बीते कई हफ्तों से इजरायल गाजा में व्यापक हवाई हमले कर रहा था. हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि 4 अक्टूबर की सुबह तक भी बमबारी की खबरें सामने आई थीं. लेकिन ट्रंप की पहल के तहत दोनों पक्षों के बीच बढ़ती सहमति के बाद इजरायल ने अस्थायी रूप से सैन्य कार्रवाई रोक दी है, जिससे इस क्षेत्र में कुछ राहत महसूस की जा रही है.
क्या अब खत्म होगा दो साल पुराना संघर्ष?
ट्रंप प्रशासन की यह योजना गाजा संकट को समाप्त करने की दिशा में एक निर्णायक प्रयास मानी जा रही है. यदि दोनों पक्षों के बीच पूर्ण सहमति बनती है, तो यह संघर्ष, जो दो वर्षों से चल रहा है, आखिरकार खत्म हो सकता है. हालांकि चुनौतियां अभी बाकी हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उम्मीद है कि अब इस संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान संभव है.
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