Doomsday Fish in Tamil Nadu: हाल ही में डूम्सडे फिश यानी ओरफिश की बार-बार दिखाई देने की खबरों ने समुद्री किनारों पर सनसनी मचा दी है. भारत के तमिलनाडु में भी यह मछली मछुआरों को मिली है, जिसने एक बार फिर लोगों के मन में चिंता और जिज्ञासा दोनों को जगा दिया है. इस लंबी और चमकदार मछली को देखकर लोग प्रलय की भविष्यवाणी करने लगे हैं, लेकिन क्या इसमें कोई वैज्ञानिक आधार भी है?
तमिलनाडु में मिली डूम्सडे फिश
रामनाथपुरम जिले के मछुआरों ने मन्नार की खाड़ी से लौटते समय एक 6 किलो वजन वाली ओरफिश पकड़ी. यह मछली काफी लंबी और चमकदार थी, जिसे देखकर मछुआरों के साथ-साथ स्थानीय लोगों में भी चर्चा छिड़ गई. पिछले कुछ महीनों में तमिलनाडु में यह दूसरी बार है जब इस मछली को देखा गया है. इतिहास में जब भी ओरफिश दिखाई देती है, तो लोग इसे किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा की चेतावनी मानते हैं.
ओरफिश: समुद्र की गहराइयों से आई मछली
वैज्ञानिक भाषा में इसे रीगलेकस ग्लेस्नी कहा जाता है. यह मछली लगभग 3300 फीट की गहराई में रहती है और इसलिए इसे देख पाना बेहद दुर्लभ होता है. इसका शरीर चमकदार सफेद और लाल रंग का होता है, जो इसे अन्य मछलियों से अलग बनाता है. इसकी गहराई में रहने की वजह से यह आम तौर पर मछुआरों के जाल में नहीं फंसती, इसलिए इसके सतह पर आने के पीछे खास कारण हो सकते हैं.
क्या सच में ओरफिश लाती है प्रलय?
जापान समेत कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ओरफिश को अशुभ माना जाता है. जापान में साल 2011 की सुनामी के पहले भी इसे देखा गया था, जिसके बाद इस मछली को भूकंप और सुनामी का संकेत माना जाने लगा. इसके अलावा कई जगहों पर भी इसे प्राकृतिक आपदाओं से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन क्या यह केवल मान्यताएं हैं या वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: क्या है हकीकत?
मरीन बायोलॉजिस्ट इस बात से सहमत नहीं हैं कि ओरफिश के सतह पर आने का मतलब प्राकृतिक आपदा है. उनका कहना है कि कई कारण हो सकते हैं, जैसे मछली का घायल या बीमार होना, समुद्र में तेज धाराओं की वजह से मार्ग भटक जाना, या जीवन के अंतिम चरण में होना. 2019 में प्रशांत महासागर में हुए एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि ओरफिश के दिखने और भूकंप के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध स्थापित नहीं हो पाया है.
ये भी पढ़ें: PM मोदी ने नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का किया उद्घाटन, कहा - मेरा सपना है हवाई चप्पल पहनने वाला...