अब और घातक होगी Astra-II मिसाइल, अपनी ही चाल में फंस गया चीन, DRDO ने खोला PL-15 का पुर्जा-पुर्जा

चीन और पाकिस्तान की सामरिक साझेदारी अब खुद चीन के लिए परेशानी का कारण बनती दिख रही है. हाल ही में भारतीय सीमा क्षेत्र में एक अप्रत्याशित घटना सामने आई जिसने भारत के रक्षा अनुसंधान क्षेत्र के लिए एक दुर्लभ अवसर प्रदान किया.

DRDO has dismantled every part of Chinas PL-15 missile
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नई दिल्ली: चीन और पाकिस्तान की सामरिक साझेदारी अब खुद चीन के लिए परेशानी का कारण बनती दिख रही है. हाल ही में भारतीय सीमा क्षेत्र में एक अप्रत्याशित घटना सामने आई जिसने भारत के रक्षा अनुसंधान क्षेत्र के लिए एक दुर्लभ अवसर प्रदान किया. दरअसल, पाकिस्तान द्वारा दागी गई एक चीनी मिसाइल, जो अपने लक्ष्य को भेदने में असफल रही, सुरक्षित हालत में भारत के पंजाब राज्य में बरामद की गई. इससे भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों को चीन की आधुनिक PL-15E मिसाइल की अंदरूनी तकनीकों को बेहद बारीकी से समझने का सुनहरा मौका मिला.

9 मई 2025 को पंजाब के होशियारपुर जिले के एक खेत में एक मिसाइल का अवशेष पूरी तरह से सुरक्षित अवस्था में पाया गया. यह मिसाइल किसी प्रकार का विस्फोट नहीं कर पाई थी और इसे बिना किसी क्षति के बरामद किया गया. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिसाइल PL-15E है, जो चीन द्वारा पाकिस्तान को दी गई दृश्य-सीमा से परे मार करने वाली (Beyond Visual Range – BVR) एयर-टू-एयर मिसाइल है.

लक्ष्य को नहीं भेद सकी PL-15 मिसाइल

ऐसा माना जा रहा है कि यह मिसाइल पाकिस्तान के JF-17 थंडर या J-10C फाइटर जेट से लॉन्च की गई थी, लेकिन वह अपने लक्ष्य को नहीं भेद सकी और हवा में उड़ते हुए भारतीय क्षेत्र में लगभग 100 किलोमीटर तक प्रवेश कर गई.

क्यों है यह घटना महत्वपूर्ण?

इस प्रकार की मिसाइलें आम तौर पर उन्नत तकनीक से लैस होती हैं और इनमें आत्म-विनाश (Self-destruction) प्रणाली होती है, ताकि यदि मिसाइल लक्ष्य से चूक जाए तो वह किसी अन्य देश के हाथ न लग सके. लेकिन PL-15E में ऐसी कोई प्रणाली नहीं थी, जिसके कारण यह मिसाइल बिना विस्फोट के भारतीय जमीन पर गिरी और पूरी तरह से संरक्षित मिल गई.

भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने इस मिसाइल का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया है. इस प्रक्रिया में मिसाइल की डिजाइन, इंजन प्रणाली, रडार तकनीक और अन्य उन्नत तत्वों की गहन जांच की गई. रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन की यह मिसाइल न केवल तेज गति (मैक 5 से अधिक) से चलने में सक्षम है, बल्कि इसमें मिनी AESA (Active Electronically Scanned Array) रडार और एंटी-जैमिंग टेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक विशेषताएं भी मौजूद हैं.

अस्त्र मार्क-2 को मिलेगी नई धार

भारत पहले से ही अपने स्वदेशी BVR एयर-टू-एयर मिसाइल प्रोग्राम ‘अस्त्र’ पर काम कर रहा है. अस्त्र मार्क-1 पहले ही भारतीय वायुसेना में शामिल हो चुकी है, और अब DRDO अस्त्र मार्क-2 के विकास को और अधिक उन्नत बनाने की दिशा में काम कर रहा है. PL-15E से प्राप्त तकनीकी जानकारी को अब अस्त्र मार्क-2 में समाहित किया जा रहा है.

विशेष रूप से मिसाइल के रडार सिस्टम, प्रोपल्शन तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता से जुड़ी जानकारियों को DRDO अपने अनुसंधान में इस्तेमाल कर रहा है. इससे आने वाले समय में अस्त्र मिसाइल न केवल पाकिस्तान बल्कि चीन के खिलाफ भी एक सशक्त और प्रभावी हथियार सिद्ध हो सकती है.

चीन की रणनीति उलटी पड़ी

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे रोचक पहलू यह है कि जिस मिसाइल को चीन ने पाकिस्तान को अपनी रणनीतिक बढ़त के रूप में दिया था, वही अब भारत के लिए एक खुफिया खजाना बन गई है. आम तौर पर ऐसी मिसाइलें दुश्मन देश के हाथ न लगें, इसके लिए कई सुरक्षा उपाय होते हैं. लेकिन PL-15E में इनकी कमी चीन की बड़ी चूक मानी जा रही है.

इससे एक ओर जहां भारत को अपने मिसाइल सिस्टम को और उन्नत करने का मौका मिला है, वहीं दूसरी ओर चीन की उन्नत रक्षा तकनीक अब भारत की प्रयोगशालाओं में परीक्षण और अनुकरण के लिए उपलब्ध हो गई है. यह न केवल भारत के स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम को मजबूती देगा, बल्कि चीनी तकनीक की कमियों को भी उजागर करेगा.

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