Natural Gas Discovery: केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का यह बयान अब सिर्फ एक विज़न नहीं, बल्कि हकीकत में बदलता हुआ भविष्य बन चुका है. भारत के ऊर्जा क्षेत्र ने एक बड़ी छलांग लगाई है, और यह छलांग अंडमान सागर की गहराइयों से निकली है. श्री विजयपुरम-2 नामक गहराई से खोजा गया कुआं अब ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की एक बड़ी उपलब्धि बन चुका है.
यह कुआं अंडमान द्वीपसमूह के पूर्वी तट से करीब 17 किलोमीटर दूर स्थित है. समुद्र की सतह से लगभग 295 मीटर गहराई पर मौजूद यह कुआं समुद्र के तल से कुल 2650 मीटर तक ड्रिल किया गया. यानी जमीन और समुद्र की इतनी गहराई में जाकर भारत ने एक ऐसा खजाना खोज निकाला है, जो आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा ज़रूरतों का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है.
क्या मिला श्री विजयपुरम-2 में?
प्रारंभिक उत्पादन परीक्षण (Initial Production Testing) के अनुसार, 2212 से 2250 मीटर की गहराई पर प्राकृतिक गैस मौजूद है. परीक्षण के दौरान समय-समय पर गैस का फ्लेयरींग भी देखा गया, जिससे पता चला कि दबाव और मात्रा दोनों संतोषजनक हैं.
सबसे खास बात यह है कि गैस के सैंपल में 87% मीथेन (Methane) पाई गई, यानी उच्च ऊर्जा क्षमता वाली गैस, जिसे सीधे कमर्शियल उत्पादन और एलएनजी (LNG) के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है.
परीक्षण कहां हुआ?
गैस के सैंपल्स को समुद्री जहाज़ के जरिए काकिनाडा लाया गया, जहां वैज्ञानिकों ने इनकी उन्नत तकनीक से जांच की. रिपोर्ट में मीथेन की अधिकता ने सभी को चौंका दिया, ये न केवल तकनीकी सफलता है, बल्कि रणनीतिक रूप से भी भारत के लिए एक गेमचेंजर हो सकती है.
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर भारत
इस खोज का महत्व केवल वैज्ञानिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीति से भी जुड़ा है. भारत अब तक प्राकृतिक गैस और अन्य ऊर्जा संसाधनों के लिए बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर रहा है. लेकिन श्री विजयपुरम-2 से मिली गैस हमें यह संकेत देती है कि अब देश को अपनी मिट्टी और समंदर से ऊर्जा मिल सकती है. यह खोज अंडमान-निकोबार जैसे भू-राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र में ऊर्जा निवेश के नए अवसर भी खोलती है.
आगे की रणनीति
केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि अब इस कुएं से वाणिज्यिक उत्पादन की योजना तैयार की जाएगी. आने वाले वर्षों में यदि यह सफल होता है, तो भारत के लिए स्थानीय स्तर पर ऊर्जा उत्पादन, उद्योगों को सस्ती गैस, और नई नौकरियों का मार्ग प्रशस्त हो सकता है.
क्षेत्रीय और वैश्विक असर
मीथेन की उच्च प्रतिशतता इस खोज को न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद बनाती है, बल्कि भारत को एलएनजी के वैश्विक निर्यातक के रूप में उभरने का मौका भी देती है. इससे भारत एशिया के ऊर्जा बाजार में अपनी स्थिति और भी मजबूत कर सकता है, खासकर तब जब पूरी दुनिया ग्रीन और क्लीन एनर्जी की तरफ रुख कर रही है.
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