जहां की जमीन से निकली है वो ज्वालामुखी, कैसे हैं वहां के हाल

अफ्रीका के शांत रेगिस्तानी इलाकों में आम दिनों की तरह सूरज ढल रहा था, लेकिन रविवार को अचानक धरती ने अपनी ताकत दिखा दी. इथियोपिया के अफार क्षेत्र में हेयली गुब्बी ज्वालामुखी ने वर्षों की चुप्पी तोड़ते हुए जबरदस्त विस्फोट किया.

Ethiopia condition after volcano burst ash covered
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अफ्रीका के शांत रेगिस्तानी इलाकों में आम दिनों की तरह सूरज ढल रहा था, लेकिन रविवार को अचानक धरती ने अपनी ताकत दिखा दी. इथियोपिया के अफार क्षेत्र में हेयली गुब्बी ज्वालामुखी ने वर्षों की चुप्पी तोड़ते हुए जबरदस्त विस्फोट किया. पल भर में वातावरण लाल अंगारों और काले धुएं से भर गया. वैज्ञानिकों के अनुसार यह विस्फोट न सिर्फ स्थानीय इलाकों को हिलाकर गया, बल्कि इसका असर हजारों किलोमीटर दूर भारत तक देखने को मिला.


हेयली गुब्बी ज्वालामुखी लगभग 500 मीटर ऊंचा है और अदीस अबाबा से करीब 500 मील उत्तर-पूर्व में स्थित है. यह जगह रिफ्ट वैली का हिस्सा है, एक ऐसा क्षेत्र जो लगातार भूगर्भीय गतिविधियों से सक्रिय रहता है. यहां दो टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं, जिससे जमीन के भीतर लगातार उथल-पुथल बनी रहती है. विस्फोट के चलते आसपास के छोटे गांव राख से ढक गए, लेकिन क्षेत्र रेगिस्तानी होने और जनसंख्या कम होने की वजह से बड़ा नुकसान टल गया.

विस्फोट के समय कैसा था मंजर

ज्वालामुखी के फटते ही वायुमंडल में 14 किलोमीटर तक राख छिटक गई. घने धुएं ने कुछ ही मिनटों में आसपास का आसमान ढक लिया. कई स्थानीय निवासियों ने बताया कि पहले एक तेज धमाका हुआ, जैसे किसी ने आसमान में बम फेंक दिया हो. इसके बाद जमीन कांपने लगी और राख के बादल ऊपर उठने लगे. अफार के रहने वाले अहमद अब्देला ने बताया कि धुआं और राख इतनी तेज फैल रही थी कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था. कई यात्री दानाकिल रेगिस्तान में फंस गए.

पहले नहीं दर्ज था इस ज्वालामुखी का कोई इतिहास

स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के ग्लोबल वॉल्केनिज्म प्रोग्राम ने बताया कि होलोसीन काल यानी पिछले लगभग 12,000 वर्षों में इस ज्वालामुखी के विस्फोट का कोई प्रमाण नहीं मिलता. मिशिगन टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के ज्वालामुखी विज्ञानी साइमन कार्न के अनुसार यह घटना बेहद दुर्लभ है क्योंकि इस पहाड़ी का कोई पुराना रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. इस कारण क्षेत्र की निगरानी अचानक बढ़ा दी गई है.

भारत तक पहुंच गया काला धुआं

ज्वालामुखी से उठी राख पहले यमन और ओमान की ओर फैलकर अरब सागर में दाखिल हुई. इसके बाद हवा के रुख ने इसे पाकिस्तान और उत्तरी भारत की दिशा में धकेल दिया. भारतीय मौसम विभाग और ज्वालामुखी राख सलाहकार केंद्र के अनुसार सोमवार और मंगलवार को राख के बादल भारत के पश्चिमी और उत्तरी हवाई क्षेत्र तक पहुंच गए, जिससे उड़ानों पर असर पड़ा.

हजारों यात्रियों पर पड़ा असर, कई उड़ानें रद्द

राख के कारण विमान इंजन को खतरा होने की आशंका रहती है, जिसके चलते भारत की कई प्रमुख एयरलाइनों ने ऐहतियाती कदम उठाए. एयर इंडिया ने 11 उड़ानें रद्द कर दीं जबकि अकासा एयर ने जेद्दा, कुवैत और अबू धाबी की सेवाएं रोक दीं. इंडिगो की कन्नूर–अबू धाबी उड़ान को सोमवार रात अहमदाबाद डायवर्ट करना पड़ा. एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ा और वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गईं.

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