इथियोपिया में 10 हजार साल बाद फटा ज्वालामुखी, कई उड़ानों पर असर; पढ़ें डिटेल

एथियोपिया के अफ़ार रिफ्ट में स्थित हैउली गब्बी ज्वालामुखी का अचानक हजारों साल बाद सक्रिय होना दुनिया भर के एविएशन नेटवर्क के लिए बड़ा खतरा बनकर उभरा है.

Ethiopia Volcano Erupt Many Flight Diverted Advisory issued
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एथियोपिया के अफ़ार रिफ्ट में स्थित हैउली गब्बी ज्वालामुखी का अचानक हजारों साल बाद सक्रिय होना दुनिया भर के एविएशन नेटवर्क के लिए बड़ा खतरा बनकर उभरा है. रविवार को हुए विस्फोट में ज्वालामुखी से उठी राख लगभग 45,000 फीट ऊंचाई तक पहुंच गई, जिसने न सिर्फ स्थानीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी असर डालना शुरू कर दिया है. जेट स्ट्रीम के सहारे यह राख का बादल तेजी से भारत की हवाई सीमाओं की ओर बढ़ रहा है, जिससे एयरलाइंस को तुरंत कई आपात फैसले लेने पड़े हैं.


ज्वालामुखी से निकले राख के घने बादल ने वेस्ट एशिया और भारत के बीच चलने वाली उड़ानों पर सबसे बड़ा प्रभाव डाला है. सोमवार को बड़ी संख्या में उड़ानों को रद्द करना पड़ा जबकि कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बीच हवा में ही डायवर्ट कर दी गईं. इंडिगो और अकासा एयर ने सबसे पहले कदम उठाते हुए प्रभावित कॉरिडोरों पर कई उड़ानें निलंबित कर दीं. अन्य एयरलाइंस भी अपने-अपने नेटवर्क पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

DGCA की कड़ी निगरानी और निर्देश

जैसे-जैसे राख का फैलाव बढ़ रहा है, भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने सतर्क रहते हुए सभी एयरलाइंस को विस्तृत सलाह जारी कर दी है. DGCA ने आदेश दिया है कि हवाई मार्गों और उड़ान ऊंचाइयों को तत्काल पुनः निर्धारित किया जाए ताकि विमान राख से प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहें. साथ ही ईंधन की योजना को भी बदलने और आपात स्थितियों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त अनुमान लगाने को कहा गया है. एयरलाइंस को निर्देश दिया गया है कि सुरक्षा प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन किया जाए और हर उड़ान के बाद इंजनों व एयरफ्रेम की विशेष जांच अनिवार्य की जाए.

उड़ानों के डायवर्ट होने से यात्रियों की परेशानी बढ़ी

राख के बादल का खतरा इतना बढ़ गया है कि कई अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स को नए मार्गों पर भेजना पड़ा है. इंडिगो की कान्नूर–अबू धाबी उड़ान को भी इसी खतरे के कारण अहमदाबाद लैंड कराना पड़ा. अकासा एयर ने जेद्दाह, कुवैत और अबू धाबी के लिए उड़ानें फिलहाल रद्द कर दी हैं और यात्रियों को सात दिनों के भीतर पूरा रिफंड या मुफ्त री-बुकिंग का विकल्प दिया है. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने स्थिति को गंभीर मानते हुए ASHTAM चेतावनी जारी की है, जिसमें राख के स्थान, ऊंचाई और उसकी गति की सटीक जानकारी दी जाती है, ताकि उड़ानें सुरक्षित मार्ग चुन सकें.

आधुनिक एविएशन सिस्टम के लिए खतरे की घंटी

यह घटना बताती है कि आधुनिक तकनीक से संचालित एविएशन सिस्टम भी प्राकृतिक आपदाओं के असर से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. ज्वालामुखीय राख के कारण न केवल फ्लाइट रूट बदलने पड़ रहे हैं, बल्कि ईंधन प्रबंधन से लेकर सुरक्षा प्रोटोकॉल तक हर कदम पर सावधानी बरतनी पड़ रही है. इंजन चोक होने, एयरक्राफ्ट की बॉडी को नुकसान पहुंचने और विजिबिलिटी कम होने जैसे जोखिम इस स्थिति को और भी खतरनाक बना देते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना भविष्य में वैश्विक हवाई यातायात को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय जोखिमों की याद दिलाती है, जिन्हें लेकर समय रहते मजबूत रणनीतियां बनानी होंगी.

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