जब यूरोप ने इज़राइल से दूरी बनाई, तब भारत ने निभाई दोस्ती; दोनों देशों के बीच हुई ऐतिहासिक डिफेंस डील

Israel India Defense Deal: जब दुनिया के कई पश्चिमी देश गाज़ा युद्ध के चलते इज़राइल से दूरी बना रहे हैं, ऐसे समय में भारत ने एक बार फिर अपने पुराने मित्र के साथ खड़े होने का संकेत दिया है. नई दिल्ली और तेल अवीव ने रक्षा, औद्योगिक और प्रौद्योगिकी सहयोग को मज़बूत करने के लिए एक नया समझौता ज्ञापन (MoU) साइन किया है.

Europe distanced itself from Israel India maintained friendship Historic defense deal signed
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Israel India Defense Deal: जब दुनिया के कई पश्चिमी देश गाज़ा युद्ध के चलते इज़राइल से दूरी बना रहे हैं, ऐसे समय में भारत ने एक बार फिर अपने पुराने मित्र के साथ खड़े होने का संकेत दिया है. नई दिल्ली और तेल अवीव ने रक्षा, औद्योगिक और प्रौद्योगिकी सहयोग को मज़बूत करने के लिए एक नया समझौता ज्ञापन (MoU) साइन किया है.

यह बैठक मंगलवार को भारत-इज़राइल ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) की वार्षिक मीटिंग के दौरान हुई, जिसकी अध्यक्षता भारतीय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और इज़राइल रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (रिटायर्ड) अमीर बराम ने की.

भारत-इज़राइल रक्षा साझेदारी, विश्वास की नई मिसाल

इस बैठक के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, औद्योगिक सहयोग और तकनीकी नवाचार पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई. जानकारी के मुताबिक, भारत इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ (IAI) से मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (MR-SAM) लगभग 3.75 अरब डॉलर में खरीदेगा.

इसके अलावा, IAI करीब 900 मिलियन डॉलर में छह कमर्शियल विमानों को भारतीय वायुसेना के लिए ईंधन भरने वाले विमानों (air-to-air refueller) में परिवर्तित करेगा. मेजर जनरल अमीर बराम ने बैठक के बाद कहा, “भारत के साथ यह रणनीतिक संवाद ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक परिदृश्य चुनौतीपूर्ण है. हमारा रक्षा सहयोग भरोसे, साझा सुरक्षा हितों और पारस्परिक सम्मान पर आधारित है.”

तीन दशक पुरानी साझेदारी, जो समय के साथ और मजबूत हुई

भारत और इज़राइल के बीच 1990 के दशक से कूटनीतिक संबंध हैं, और तब से लेकर अब तक इज़राइल भारत का सबसे विश्वसनीय रक्षा साझेदार बन गया है. दोनों देशों के बीच सहयोग सिर्फ रक्षा खरीद तक सीमित नहीं, बल्कि संयुक्त अनुसंधान, उत्पादन और प्रौद्योगिकी साझाकरण तक फैला हुआ है.

कारगिल युद्ध के दौरान इज़राइल ने भारत को जो रणनीतिक मदद दी थी, उसके बाद से यह रिश्ता और गहरा हुआ. अब यह नया समझौता इस साझेदारी को एक और ऊँचाई पर ले जाता है, खासकर तब, जब दुनिया के कई देश इज़राइल के खिलाफ रुख़ अपना रहे हैं.

भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का संदेश

भारत का यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक स्पष्ट संकेत है कि वह अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) की नीति से विचलित नहीं होगा. जब कई लोकतांत्रिक देश इज़राइल के साथ रक्षा सहयोग सीमित कर रहे हैं, तब भारत का यह निर्णय बताता है कि नई दिल्ली अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देती है. अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह “दो लोकतांत्रिक और तकनीकी रूप से सक्षम देशों की साझेदारी को और मज़बूत करेगा.”

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