नेपाल के लिए खतरे की घंटी! क्या मचने वाली है बड़ी तबाही? विशेषज्ञों की खौफनाक चेतावनी से हड़कंप

Science News: नेपाल में 42 हिमनद झीलों को लेकर हाल ही में एक गंभीर चेतावनी दी गई है, जिससे स्थानीय प्रशासन और आम लोग चिंतित हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, ये झीलें अचानक फट सकती हैं, जिससे भारी जनहानि और बुनियादी ढांचे को नुकसान हो सकता है.

Experts warn 42 glacial lakes in Nepal are at high risk of bursting
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Science News: नेपाल में 42 हिमनद झीलों को लेकर हाल ही में एक गंभीर चेतावनी दी गई है, जिससे स्थानीय प्रशासन और आम लोग चिंतित हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, ये झीलें अचानक फट सकती हैं, जिससे भारी जनहानि और बुनियादी ढांचे को नुकसान हो सकता है. आईसीआईएमओडी (इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट) के विशेषज्ञ शरद प्रसाद जोशी ने इस खतरे को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है, जो नेपाल के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकती है.

हिमनद झीलों में बदलाव और उसके जोखिम

आईसीआईएमओडी के विशेषज्ञ शरद प्रसाद जोशी ने एक बैठक के दौरान बताया कि नेपाल में 2,069 हिमनद झीलों में से 42 झीलों को “अत्यधिक जोखिम” की श्रेणी में रखा गया है. इन सभी झीलों का मुख्य रूप से स्थित होना कोशी प्रांत में है. अगर इनमें से कोई भी झील फटती है, तो इसका असर न केवल आसपास के क्षेत्रों पर पड़ेगा, बल्कि इससे बड़े पैमाने पर जनहानि और पर्यावरणीय तबाही हो सकती है. जोशी ने इस संबंध में आईसीआईएमओडी की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें इन झीलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है.

संखुवासभा जिले में उच्च जोखिम वाली झीलें

संखुवासभा जिले में चार ऐसी हिमनद झीलें हैं, जिन्हें उच्च जोखिम में रखा गया है. इन झीलों में भोटखोला और मकालू इलाके शामिल हैं, जिनकी स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है. इन झीलों में सबसे ज्यादा खतरा लोअर बारुन इलाके की तलोपोखरी हिमनद झील से है, जो लगभग 3 किलोमीटर लंबी और 206 मीटर गहरी है. इस झील का आसपास का क्षेत्र भी गहरा है, जिसमें 15 से 25 मीटर की गहराई तक पानी है. यदि यह झील फटती है, तो अरुण घाटी की कई बस्तियां और उनके बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हो सकता है.

सुरक्षा उपायों पर काम जारी

नेपाल सरकार और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं मिलकर इन खतरनाक झीलों से होने वाली संभावित आपदाओं को टालने के लिए उपायों पर काम कर रही हैं. आईसीआईएमओडी, जल एवं मौसम विज्ञान विभाग और यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम नेपाल मिलकर इन झीलों के खतरों को कम करने के उपायों पर काम कर रहे हैं. जोशी ने इस दौरान सतर्कता और तैयारी को लेकर स्थानीय प्रशासन और जनता को जागरूक करने की बात की.

महिलाओं और बच्चों को खतरा

आईसीआईएमओडी की विशेषज्ञ नीरा श्रेष्ठा प्रधान ने भी इस खतरे के दौरान महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए बढ़ते जोखिम की बात की. उनका कहना था कि प्राकृतिक आपदाओं के समय ये वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. इसलिए, इन समूहों के लिए विशेष प्रबंध और जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि इन झीलों के आसपास रहने वाली जनता में आपदा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में बेहतर तरीके से निपटा जा सके.

नेपाल के लिए आने वाली चुनौतियाँ

नेपाल में बढ़ती ग्लेशियल झीलों की संख्या और उनका खतरा इस बात का संकेत है कि देश में प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्कता और सुरक्षा की दिशा में ज्यादा कदम उठाए जाने की आवश्यकता है. यदि इन झीलों से जुड़े खतरे को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह नेपाल के लिए एक बड़ा संकट साबित हो सकता है.

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