जमीन पर ट्रंप-पुतिन की बैठक, तो आसमान में गरजेंगे F-22 और Su-57, दुनिया देखेगी अमेरिका-रूस की ताकत!

जब वैश्विक राजनीति के दो दिग्गज नेता अमेरिका के और वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर आमने-सामने बैठेंगे, तो केवल जमीन पर ही नहीं बल्कि आसमान में भी एक अनोखा दृश्य देखने को मिलेगा.

F-22 and Su-57 will roar in the sky during Trump-Putin meeting
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Sociel Media

मॉस्को/वॉशिंगटन: जब वैश्विक राजनीति के दो दिग्गज नेता अमेरिका के और वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर आमने-सामने बैठेंगे, तो केवल जमीन पर ही नहीं बल्कि आसमान में भी एक अनोखा दृश्य देखने को मिलेगा. इस ऐतिहासिक बैठक की जगह बनेगी अलास्का का एल्मेंडॉर्फ-रिचर्डसन एयरबेस, जो अमेरिका की सैन्य ताकत का प्रतीक माना जाता है.

लेकिन इस समिट की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान रूस के अत्याधुनिक Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट भी अमेरिका के F-22 रैप्टर के इलाके में उड़ान भरते नजर आएंगे. ऐसा पहली बार होगा जब दोनों देशों के ये पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट एक ही हवाई क्षेत्र में मौजूद रहेंगे जिससे सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक संकेत भी दुनिया को मिलेंगे.

दो स्टील्थ दिग्गजों की पहली मुलाकात

F-22 रैप्टर और Su-57 फेलॉन ये दोनों विमान आधुनिक युद्धक तकनीक का शिखर माने जाते हैं. ये लड़ाकू विमान न केवल दुश्मन की पकड़ से बचकर उड़ान भर सकते हैं, बल्कि अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस हैं और हवा में श्रेष्ठता पाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए हैं.

F-22 अमेरिका की वायु शक्ति का प्रतीक है. इसकी स्टेल्थ तकनीक, उच्च गतिशीलता और अदृश्यता इसे दुनिया के सबसे खतरनाक जेट्स में शामिल करती है. दूसरी ओर, Su-57 रूस का पहला फुल-फ्लेज्ड स्टेल्थ फाइटर है, जिसे लंबी दूरी के ऑपरेशन और बहु-भूमिका वाले मिशनों के लिए तैयार किया गया है.

मुलाकात और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन

डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन की यह मुलाकात कई मायनों में खास है. यह ट्रंप की राष्ट्रपति पद की वापसी के बाद पहली बार है जब वह पुतिन के साथ आमने-सामने वार्ता करेंगे. इस मीटिंग को लेकर विश्व स्तर पर निगाहें टिकी हैं, लेकिन इसके साथ ही सैन्य विश्लेषकों की नजरें भी आसमान पर रहेंगी जहां दो महान फाइटर जेट्स के बीच संभावित इंटरैक्शन हो सकता है.

न्यूजवीक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन इस बैठक में शामिल होने के लिए अपने साथ कुछ Su-57 फाइटर जेट्स भी ला सकते हैं. और चूंकि एल्मेंडॉर्फ-रिचर्डसन बेस पर अमेरिका के अधिकांश F-22 जेट पहले से ही तैनात हैं, यह पहली बार होगा जब दोनों विमान एक-दूसरे के इतने करीब होंगे.

छिपाने और समझने की रणनीति

डच थिंक टैंक TNO के रणनीतिक विश्लेषक फ्रेडरिक मर्टेंस का मानना है कि यदि Su-57 और F-22 वास्तव में एक ही हवाई क्षेत्र में मौजूद रहते हैं, तो दोनों देश एक-दूसरे की क्षमताओं को परखने की पूरी कोशिश करेंगे. लेकिन इसके साथ ही वे यह भी चाहेंगे कि उनकी असली ताकतें सामने न आएं.

मर्टेंस के अनुसार, F-22 अब भी स्टेल्थ तकनीक के मामले में अव्वल है और इसकी डिज़ाइन इतनी परिष्कृत है कि इसे पकड़ पाना बेहद मुश्किल होता है. वहीं, Su-57 अभी भी पारंपरिक रूसी डिज़ाइन की झलक देता है, जो Su-27 जैसे पुराने विमानों से काफी मिलता-जुलता है.

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि Su-57 को कमतर नहीं आंका जा सकता. यह एक अत्यंत सक्षम और शक्तिशाली विमान है, जो कई जटिल युद्ध स्थितियों में अमेरिका के विमानों को टक्कर दे सकता है.

रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक खेल

इस तरह के घटनाक्रम को सिर्फ तकनीकी स्तर पर नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक और प्रचार स्तर पर भी देखा जा रहा है. अगर रूसी Su-57 अमेरिकी F-22 के बगल में उड़ते नजर आते हैं, तो यह रूस के लिए एक बड़ा PR (पब्लिक रिलेशन) अवसर होगा. इससे रूस यह संदेश देने की कोशिश करेगा कि उसके पास भी अमेरिका जैसी उन्नत तकनीक है और वह किसी भी मोर्चे पर पीछे नहीं है.

युद्धाभ्यास न सही, लेकिन यह निकटता दोनों देशों को यह समझने का मौका जरूर देगी कि उनका विरोधी किस स्तर पर है और यही बात इस मुलाकात को और भी खास बना देती है.

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