साथ आए F-35B और SU-30MKI फाइटर जेट, हिंद महासागर में किया युद्धाभ्यास, चीन-पाकिस्तान में डर का माहौल

हिंद महासागर क्षेत्र में भारत और यूनाइटेड किंगडम की सेनाओं के बीच एक अभूतपूर्व और व्यापक संयुक्त सैन्य अभ्यास को अंजाम दिया गया, जिसने न केवल दोनों देशों के बीच सैन्य साझेदारी को नई ऊंचाई दी, बल्कि चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को भी एक स्पष्ट संदेश दिया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अब बहुराष्ट्रीय सैन्य तालमेल मजबूत होता जा रहा है.

F-35B and SU-30MKI fighter jets together in the Indian Ocean
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली: हिंद महासागर क्षेत्र में भारत और यूनाइटेड किंगडम की सेनाओं के बीच एक अभूतपूर्व और व्यापक संयुक्त सैन्य अभ्यास को अंजाम दिया गया, जिसने न केवल दोनों देशों के बीच सैन्य साझेदारी को नई ऊंचाई दी, बल्कि चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को भी एक स्पष्ट संदेश दिया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अब बहुराष्ट्रीय सैन्य तालमेल मजबूत होता जा रहा है.

यह संयुक्त अभ्यास भारतीय वायु सेना (IAF) और ब्रिटिश रॉयल नेवी के बीच संपन्न हुआ, जिसमें अत्याधुनिक फाइटर जेट्स, निगरानी विमान और युद्धपोतों की तैनाती की गई. इस अभ्यास का नाम कोंकण-25 रखा गया था, जो हर वर्ष आयोजित होने वाले भारत-ब्रिटेन सैन्य अभ्यास का हिस्सा है.

आसमान में साथ दिखे Su-30MKI और F-35B

इस वर्ष के संस्करण में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहा भारत के Su-30MKI फाइटर जेट्स और ब्रिटेन के F-35B स्टील्थ फाइटर विमानों का एक साथ युद्धाभ्यास करना. F-35B, जो अमेरिका द्वारा निर्मित अत्याधुनिक स्टील्थ फाइटर है, वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग की क्षमता रखता है और इसे ब्रिटिश एयरक्राफ्ट कैरियर HMS Prince of Wales से ऑपरेट किया गया.

भारतीय वायुसेना की ओर से इसमें Su-30MKI, Jaguar फाइटर जेट्स, साथ ही AEW&C (Airborne Early Warning & Control) और AWACS (Airborne Warning and Control System) विमान शामिल हुए. यह सभी विमान रणनीतिक तौर पर उच्चस्तरीय अभ्यासों में शामिल रहे.

IAF और रॉयल नेवी का साझा मिशन

भारतीय वायुसेना के अनुसार, इस संयुक्त अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (अंतर-संचालन क्षमता) को बढ़ावा देना, रणनीतिक तालमेल मजबूत करना और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थायित्व, सुरक्षा और शांति बनाए रखना है.

14 अक्टूबर को आसमान में इन फाइटर जेट्स के बीच उच्च स्तर के फॉर्मेशन उड़ान, हवाई युद्धाभ्यास और सामरिक मिशनों को अंजाम दिया गया. अभ्यास के बाद एक भव्य फ्लाईपास्ट और एयर-टू-एयर फोटोशूट का आयोजन भी किया गया, जो अभ्यास के सफल समापन का प्रतीक रहा.

समुद्री क्षेत्र में ऑपरेशन, नौसेनाएं आमने-सामने

कोंकण-25 का समुद्री चरण (Sea Phase) पहले ही 8 अक्टूबर को पूरा किया गया था, जिसमें भारतीय नौसेना और ब्रिटिश रॉयल नेवी के जहाजों, पनडुब्बियों और हेलीकॉप्टरों ने भाग लिया.

इस चरण में सतह रोधी युद्ध, पनडुब्बी रोधी अभियान, हवाई रक्षा, सामरिक युद्धाभ्यास, क्रॉस डेक लैंडिंग, और समुद्र में पुनःपूर्ति जैसे जटिल मिशन को अंजाम दिया गया.

ब्रिटिश कैरियर ग्रुप के जहाज HMS Prince of Wales और HMS Richmond इस दौरान मुंबई और गोवा बंदरगाहों पर भी पहुंचे. भारतीय नौसेना ने अपनी तरफ से INS Vikrant (स्वदेशी विमानवाहक पोत), INS Surat, INS Marmugao, INS Kolkata जैसे विध्वंसक और INS Tabar, INS Teg जैसे फ्रिगेट तैनात किए.

F-35B और MiG-29K के बीच डॉगफाइट

अभ्यास के दौरान भारतीय नौसेना के MiG-29K और रॉयल नेवी के F-35B फाइटर जेट्स के बीच हवाई युद्धाभ्यास (dogfight simulation) किया गया, जिसमें उच्च गति पर सामरिक प्रतिक्रिया, मिसाइल लॉंचिंग की प्रक्रिया, और इवेज़िव मूवमेंट्स जैसी तकनीकों को अभ्यास में शामिल किया गया.

यह अभ्यास न केवल एक युद्ध परिदृश्य की तैयारी थी, बल्कि दोनों देशों के पायलटों के बीच सामंजस्य और तकनीकी समझदारी बढ़ाने का अवसर भी था.

पनडुब्बी खोज अभियान ने दिखाई ताकत

भारत और ब्रिटेन की नौसेनाओं के बीच एक विशेष पनडुब्बी खोज अभियान (Submarine Hunt Exercise) भी आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय नौसेना की एक पनडुब्बी ने ब्रिटिश युद्धपोतों और उनके साथ चल रहे मर्लिन MK-2 हेलीकॉप्टर और P-8 नेप्च्यून समुद्री गश्ती विमान से बचने का प्रयास किया.

इस अभ्यास ने एंटी-सबमरीन वारफेयर (ASW) क्षमताओं की समीक्षा और परीक्षण का बेहतरीन अवसर प्रदान किया.

अभ्यास में जापान और नॉर्वे की भी भागीदारी

कोंकण-25 इस बार सिर्फ भारत और ब्रिटेन तक सीमित नहीं रहा. जापान का JS Akebono और नॉर्वे का HNoMS Roald Amundsen भी इस अभ्यास का हिस्सा बने. इससे यह साफ हो गया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अब बहुपक्षीय सहयोग को महत्व दिया जा रहा है और लोकतांत्रिक देश इस क्षेत्र को स्वतंत्र, सुरक्षित और समावेशी बनाए रखने के लिए एकजुट हो रहे हैं.

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