कतर के बाद हमारे उपर हमला करेगा... तुर्की के रक्षा मंत्रालय में इजरायल का डर! क्या है एर्दोगन की तैयारी?

हाल ही में कतर में हमास नेताओं पर किए गए हमले के बाद तुर्की ने गहरी चिंता जताई है और आशंका जाहिर की है कि अगला निशाना खुद तुर्की हो सकता है.

Fear of Israel in Turkish Defense Ministry
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Social Media

अंकारा/तेल अवीव: हाल ही में कतर में हमास नेताओं पर किए गए हमले के बाद तुर्की ने गहरी चिंता जताई है और आशंका जाहिर की है कि अगला निशाना खुद तुर्की हो सकता है. इस हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और भी बढ़ गया है, जिससे इजरायल और तुर्की के बीच टकराव की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं.

तुर्की सरकार और उसकी सेना ने इस पूरे घटनाक्रम को बहुत गंभीरता से लिया है. तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि अगर इजरायल ने हमलों की यह नीति जारी रखी, तो पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है.

तुर्की की बढ़ती चिंताएं और सैन्य तैयारी

तुर्की के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रियर एडमिरल जेकी अकतुर्क ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इजरायल की तरफ से हाल ही में कई देशों जैसे ईरान, यमन, सीरिया और अब कतर में किए गए हमलों से क्षेत्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है. उन्होंने कहा, "अगर इजरायल अपने इन आक्रामक कदमों को नहीं रोकेगा, तो पूरा क्षेत्र अराजकता की चपेट में आ सकता है."

इस स्थिति को देखते हुए, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने देश की सेना को उच्चतम स्तर की तैयारियों में रहने का आदेश दिया है. तुर्की ने हाल ही में अपने स्टील डोन एयर डिफेंस सिस्टम का उद्घाटन किया और मिसाइल उत्पादन को बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही, तुर्की ने अपने स्वदेशी फाइटर जेट प्रोजेक्ट "KAAN" को तेज़ी से आगे बढ़ाने का फैसला किया है.

इजरायल-तुर्की संबंधों की पृष्ठभूमि

कभी इजरायल और तुर्की के संबंध बेहद मजबूत हुआ करते थे, लेकिन 2000 के दशक के बाद से इन दोनों देशों के बीच दरारें बढ़ती चली गईं. विशेष रूप से जब से एर्दोगन सत्ता में आए हैं, तुर्की ने इजरायल की नीतियों की कड़ी आलोचना करनी शुरू कर दी. एर्दोगन लंबे समय से फिलिस्तीनी मुद्दों और हमास के पक्षधर माने जाते रहे हैं.

तुर्की के नेतृत्व ने गाजा में इजरायली कार्रवाई की कड़ी निंदा की है. राष्ट्रपति एर्दोगन ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तुलना नाजी तानाशाह हिटलर से तक कर डाली थी. उनका यह तीखा रवैया इजरायल के साथ रिश्तों में और दरार डालता गया.

हमास के कई नेता समय-समय पर तुर्की आते रहे हैं, और कुछ ने तो स्थायी निवास भी वहीं बना लिया है. इजरायल का आरोप है कि तुर्की में रहकर हमास न केवल धन जुटाता है, बल्कि आतंकवादी गतिविधियों की योजना भी बनाता है.

सीरिया: बढ़ते टकराव की एक और वजह

कतर में हुए हमले के अलावा, इजरायल और तुर्की के बीच तनाव का एक और बड़ा कारण सीरिया है. पिछले साल सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद की सत्ता का पतन हुआ, जिसके बाद तुर्की ने वहां अपने सैन्य और राजनीतिक प्रभाव को तेजी से बढ़ाया है. इजरायल नहीं चाहता कि तुर्की सीरिया में अपनी स्थिति मजबूत करे. ऐसे में दोनों देशों की इस क्षेत्र में टकराव की संभावनाएं और भी बढ़ गई हैं.

क्या इजरायल तुर्की पर हमला करेगा?

भले ही सीधे सैन्य टकराव की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही हो, लेकिन तुर्की को डर है कि इजरायल उसके देश में रह रहे हमास नेताओं को निशाना बना सकता है. यह हमला हवाई नहीं, बल्कि गुप्त ऑपरेशन के रूप में हो सकता है, जैसा कि पहले सीरिया या ईरान में देखा गया है.

ट्रेंड्स रिसर्च एंड एडवाइजरी संस्थान के विशेषज्ञ सेरहाट सुहा कुबुककुओग्लू ने कहा कि इजरायल की हालिया रणनीति जिसमें वह अंतरराष्ट्रीय नियमों की परवाह किए बिना टारगेटेड हमले करता है, पूरे क्षेत्र में एक खतरनाक मिसाल बना रही है. इससे अंकारा बेहद सतर्क हो गया है.

तुर्की की सैन्य शक्ति और नाटो की भूमिका

तुर्की, नाटो (NATO) का सदस्य देश है और सेना की दृष्टि से नाटो में अमेरिका के बाद सबसे बड़ी सैन्य शक्ति रखता है. इजरायल अगर तुर्की पर हमला करता है, तो यह नाटो के अनुच्छेद 5 का उल्लंघन माना जा सकता है, जो किसी सदस्य देश पर हमले को सभी सदस्यों पर हमला मानता है. हालांकि यह तभी लागू होता है जब हमला व्यापक रूप से सैन्य हो और नाटो इसके तहत कार्रवाई करने का निर्णय ले.

यह भी स्पष्ट है कि इजरायल के पास तकनीकी रूप से बेहद उन्नत हथियार और खुफिया क्षमताएं हैं. वहीं तुर्की के पास संख्यात्मक रूप से बड़ी सेना और मजबूत रक्षा प्रणाली है. अगर कोई सीधा युद्ध होता है, तो यह केवल इन दोनों देशों को ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है.

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