FIFA World Cup 2026: फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत में अब केवल दो दिन शेष हैं, लेकिन टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही एक नया विवाद सामने आ गया है. ईरान फुटबॉल फेडरेशन (एफएफआईआरआई) ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने ईरानी टीम के ग्रुप चरण के मुकाबलों के लिए निर्धारित टिकट आवंटन को रद्द कर दिया है. इस बार विश्व कप की मेजबानी अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको संयुक्त रूप से कर रहे हैं.
ईरान फुटबॉल फेडरेशन का दावा है कि दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक तनाव का असर खेल पर भी पड़ रहा है. फेडरेशन के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ईरानी समर्थकों को स्टेडियम तक पहुंचने से रोकने की कोशिश कर रहा है, जिससे बड़ी संख्या में प्रशंसक अपनी टीम के मुकाबले नहीं देख पाएंगे.
टिकट कोटा वापस लेने का आरोप
फेडरेशन ने बयान जारी कर कहा कि फीफा के नियमों के अनुसार प्रत्येक भाग लेने वाले देश को हर मैच के लिए लगभग 8 प्रतिशत टिकट आवंटित किए जाते हैं, जिन्हें संबंधित फुटबॉल संघ अपने समर्थकों में वितरित करता है. ईरान का आरोप है कि उसके लिए निर्धारित यही टिकट कोटा वापस ले लिया गया है, जिसके कारण वह अपने प्रशंसकों को एक भी टिकट उपलब्ध नहीं करा पा रहा है.
वीजा प्रक्रिया को लेकर भी शिकायत
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने यह भी आरोप लगाया है कि अमेरिका ने टीम के कुछ सहयोगी स्टाफ सदस्यों को वीजा जारी करने से इनकार कर दिया है. फेडरेशन का कहना है कि इस तरह की प्रशासनिक बाधाएं टीम और उसके समर्थकों के लिए अतिरिक्त मुश्किलें पैदा कर रही हैं.
एयरपोर्ट पर खिलाड़ी को रोके जाने का भी जिक्र
ईरानी पक्ष ने यह भी दावा किया कि हाल ही में अमेरिका में एक विदेशी फुटबॉलर को एयरपोर्ट पर कई घंटों तक पूछताछ के लिए रोका गया था. फेडरेशन का कहना है कि ऐसी घटनाएं खेल आयोजन के माहौल को प्रभावित कर रही हैं.
ग्रुप 'जी' में खेलेगा ईरान
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ईरान को ग्रुप 'जी' में रखा गया है. ग्रुप चरण में उसका मुकाबला बेल्जियम, मिस्र और न्यूजीलैंड से होना है. इनमें से कई मैच अमेरिकी शहरों में खेले जाएंगे, जहां टिकट आवंटन और दर्शकों की एंट्री को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.
फीफा से हस्तक्षेप की उम्मीद
ईरान फुटबॉल फेडरेशन ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को फीफा के समक्ष उठाएगा और उम्मीद कर रहा है कि विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था सभी देशों और उनके समर्थकों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करेगी. फिलहाल इस मामले पर अमेरिकी अधिकारियों या फीफा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
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