FIFA World Cup 2026: भारत में क्रिकेट का जुनून सालभर देखने को मिलता है, लेकिन फीफा वर्ल्ड कप आते ही फुटबॉल का रंग भी लोगों पर चढ़ जाता है. क्रिकेट सितारों से लेकर बॉलीवुड हस्तियों तक और बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक फुटबॉल की चर्चा तेज हो जाती है. 11 जून की रात से शुरू हो रहे फीफा वर्ल्ड कप 2026 के साथ दुनिया भर के करोड़ों प्रशंसकों की नजरें एक बार फिर इस टूर्नामेंट पर टिक जाएंगी.
96 साल में वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा विस्तार
साल 1930 में उरुग्वे में खेले गए पहले फीफा वर्ल्ड कप में सीमित संख्या में टीमें शामिल हुई थीं. समय के साथ टूर्नामेंट का दायरा लगातार बढ़ता गया और अब 2026 में पहली बार 48 टीमें खिताब के लिए मुकाबला करेंगी. यह फीफा वर्ल्ड कप का 23वां संस्करण होगा, जिसमें कुल 104 मैच खेले जाएंगे.
13 टीमों से 48 टीमों तक का सफर
शुरुआती वर्षों में वर्ल्ड कप में 13 से 16 टीमों तक हिस्सा लेती थीं. 1982 से टीमों की संख्या बढ़कर 24 हुई, जबकि 1998 से 2022 तक लगातार 32 टीमें टूर्नामेंट का हिस्सा रहीं. अब 2026 में पहली बार 48 देशों को मौका दिया गया है, जिससे टूर्नामेंट पहले से कहीं बड़ा और प्रतिस्पर्धी बन गया है.
तीन देशों में होगा आयोजन
फीफा वर्ल्ड कप 2026 की मेजबानी संयुक्त रूप से अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा कर रहे हैं. तीनों देशों के 16 अलग-अलग शहरों में मुकाबले खेले जाएंगे. यह पहला अवसर होगा जब तीन देश मिलकर फुटबॉल के इस सबसे बड़े आयोजन की मेजबानी करेंगे.
क्यों बढ़ाई गई टीमों की संख्या?
फुटबॉल की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता और नए बाजारों को जोड़ने की रणनीति के तहत टीमों की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया गया. इस बदलाव से एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों की अधिक टीमों को वर्ल्ड कप में जगह मिल सकेगी. इससे उन देशों की उम्मीदें भी बढ़ी हैं जो अब तक नियमित रूप से वर्ल्ड कप में जगह नहीं बना पाते थे.
कैसा होगा नया टूर्नामेंट फॉर्मेट?
वर्ल्ड कप 2026 में 48 टीमों को 12 समूहों में बांटा गया है. टूर्नामेंट में मैचों की संख्या बढ़कर 104 हो गई है, जो पिछले संस्करणों की तुलना में काफी अधिक है. समूह चरण के मुकाबले कई सप्ताह तक चलेंगे और इसके बाद नॉकआउट चरण की शुरुआत होगी.
39 दिनों तक चलेगा फुटबॉल का महाकुंभ
इस बार टूर्नामेंट 11 जून से 19 जुलाई तक आयोजित किया जाएगा. यानी फुटबॉल प्रेमियों को लगातार 39 दिनों तक रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे. बढ़ी हुई टीमों और नए प्रारूप के कारण यह फीफा इतिहास का सबसे बड़ा और लंबा वर्ल्ड कप माना जा रहा है.
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